तेंदुए के बाद अब हाथियों की एंट्री! दिवाली के आसपास फिर कबीरधाम पहुंचे गजराज, गन्ने के खेतों की मिठास खींच लाई क्या?
पंडरिया के अंतिम छोर कोदवा गोदान पास अमितपुर गांव के पास दिखे चार हाथी, ग्रामीणों में हलचल; पिछले साल भी दिवाली के आसपास आया था हाथियों का झुंड

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा/ ब्रजेश गुप्ता
कवर्धा। कबीरधाम जिले में इन दिनों वन्यजीवों की आवाजाही ने लोगों का ध्यान खींचा है। कुछ दिनों पहले स्नेहा अस्पताल में तेंदुए की दस्तक ने पूरे जिले को चौंका दिया था, तो अब हाथियों के एक दल ने पंडरिया क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। पंडरिया विकासखंड के अंतिम छोर पर कोदवा गोडान के पास स्थित अमितपुर गांव में चार हाथियों को देखे जाने की खबर से आसपास के गांवों में हलचल मच गई है। हाथियों की मौजूदगी के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हालांकि अब तक किसी तरह की जनहानि या फसल को नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है।
दिवाली का समय और हाथियों की वापसी, क्या है कनेक्शन?
इस घटनाक्रम का दिलचस्प पहलू यह है कि पिछले सीजन में भी दिवाली के आसपास कबीरधाम जिले के जंगलों और ग्रामीण इलाकों में हाथियों का झुंड देखा गया था। इस बार भी त्योहार के आसपास हाथियों की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हाथियों का यह मौसमी मूवमेंट है या फिर भोजन और अनुकूल वातावरण की तलाश उन्हें इस इलाके तक खींच ला रही है?
गन्ने की मिठास हाथियों को कर रही आकर्षित?
कबीरधाम जिला गन्ना उत्पादन के लिए जाना जाता है। खासकर पंडरिया क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है। ऐसे में खेतों में तैयार गन्ने की फसल हाथियों के लिए आकर्षण का कारण हो सकती है। हालांकि हाथियों के यहां पहुंचने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन गन्ने की उपलब्धता को संभावित कारण के रूप में देखा जा रहा है।
चार हाथियों की मौजूदगी, वन विभाग अलर्ट
अमितपुर गांव के आसपास चार हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग का अमला लगातार सक्रिय है। विभागीय टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है और ग्रामीणों से संपर्क बनाए हुए है। कोशिश है कि हाथियों का दल बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से आगे बढ़े और इंसानों तथा वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति निर्मित न हो।
अब सबसे बड़ा सवाल: हाथियों का अगला ठिकाना कहां होगा?
फिलहाल ग्रामीणों के लिए राहत की बात यह है कि हाथियों ने अभी तक कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। लेकिन जंगल और गांवों के आसपास उनकी मौजूदगी चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में हाथियों का दल किस दिशा में आगे बढ़ेगा, क्या वह जंगल की ओर लौटेगा या गन्ने के खेतों की तरफ रुख करेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
वन्यजीवों की इस आवाजाही ने एक बार फिर कबीरधाम के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को चर्चा में ला दिया है।




