रंगोली-पेंटिंग में दिखी हुनर की चमक, कलेक्टर ने बढ़ाया विशेष बच्चों का हौसला
अंतरराष्ट्रीय बधिर दिवस पर सिंघनपुरी के विद्यालय में हुआ आयोजन, विजेता विद्यार्थियों को किया सम्मानित

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कवर्धा। अंतरराष्ट्रीय बधिर दिवस पर ग्राम सिंघनपुरी स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवणबाधित विद्यालय में सोमवार को विशेष बच्चों के बीच उत्साह और खुशी का माहौल रहा। कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति पहुंचीं और विद्यार्थियों से आत्मीय मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। कलेक्टर ने बच्चों की प्रतिभाओं की सराहना करते हुए उन्हें पढ़ाई के साथ अपनी रुचि और हुनर को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए रंगोली और पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और कला का प्रदर्शन करते हुए आकर्षक रंगोली और पेंटिंग तैयार की। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कलेक्टर ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
रंगोली प्रतियोगिता में कमलेश्वरी प्रथम और हिमांशी द्वितीय रहीं। वहीं पेंटिंग प्रतियोगिता में भावेन्द्र साहू ने प्रथम तथा सत्यजीत बंजारे ने द्वितीय स्थान हासिल किया। पुरस्कार मिलने पर विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ नजर आया।
‘मेहनत और आत्मविश्वास से आगे बढ़ें’
कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने विद्यार्थियों से कहा कि हर बच्चे के अंदर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। जरूरत है उसे पहचानने और लगातार मेहनत करने की। उन्होंने विद्यार्थियों को पूरे मनोयोग से पढ़ाई करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विद्यालय की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की जरूरतों की जानकारी भी ली। कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों की शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे आने वाले दिनों में दोबारा विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों से मुलाकात करेंगी।
पुरस्कार से ज्यादा जरूरी था सम्मान
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बच्चों के लिए यह सिर्फ प्रतियोगिता और पुरस्कार का आयोजन नहीं था। कलेक्टर की मौजूदगी और उनके साथ आत्मीय संवाद ने विद्यार्थियों को यह महसूस कराया कि उनकी प्रतिभा और प्रयासों को भी उतनी ही अहमियत मिलती है।
रंगोली और पेंटिंग में उभरे रंगों ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक कमी की मोहताज नहीं होती। जरूरत सिर्फ अवसर, प्रोत्साहन और सही मंच की होती है।




