एक पेड़ पर 200 से ज्यादा घोंसले… जैसे पेड़ पर बस गई हो बया की पूरी बस्ती
घास और तिनकों से बना रही खूबसूरत आशियाना, मानसून में पंडरिया के गांवों में दिख रहा प्रकृति का अनोखा नजारा

ब्रजेश गुप्ता
सीजीएन न्यूज़ | पंडरिया
पंडरिया के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक पेड़ लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। वजह है इसकी डालियों पर लटकते 200 से ज्यादा बया पक्षियों के घोंसले। दूर से देखने पर ऐसा लगता है, मानो पेड़ की हर शाखा पर किसी ने छोटी-छोटी झोपड़ियां टांग दी हों। हवा चलने पर सैकड़ों घोंसलों का एक साथ झूलना इस दृश्य को और भी खूबसूरत बना देता है।
पेड़ नहीं, बया की पूरी कॉलोनी है
नदी-नालों और खेतों के आसपास खड़े बबूल, छिंद और सल्फी जैसे पेड़ बया के लिए पसंदीदा ठिकाने बने हुए हैं। मानसून के साथ प्रजनन गतिविधियां बढ़ने पर इन पेड़ों पर बया की संख्या और घोंसलों की हलचल भी बढ़ गई है।
एक ही पेड़ पर इतने अधिक घोंसले दिखाई देना अपने आप में आकर्षक दृश्य है। सुबह और शाम के समय जब बया पक्षियों की आवाजाही बढ़ती है, तो पूरा पेड़ मानो जीवंत हो उठता है।
नर बया का हुनर—तिनकों से तैयार करता है आशियाना
बया की पहचान उसके घोंसले से होती है। नर बया घास और पौधों के महीन रेशों को अपनी चोंच से बुनकर बेहद मजबूत और जटिल घोंसला तैयार करता है। घोंसला पेड़ की शाखा से जुड़ा रहता है और नीचे की ओर प्रवेश द्वार बनाया जाता है।
खास बात यह है कि देखने में बेहद हल्का और नाजुक नजर आने वाला यह घोंसला बारिश और हवा के बीच भी मजबूती से टिका रहता है। यही बया की अद्भुत निर्माण कला है, जिसने उसे पक्षियों की दुनिया का बेहतरीन ‘घोंसला बुनकर’ बना दिया है।
प्रजनन काल में पीला नजर आता है नर बया
प्रजनन काल में नर बया के शरीर पर पीला रंग अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। घोंसलों की कॉलोनी के आसपास उड़ते नर बया इस मौसम में आसानी से पहचाने जा सकते हैं।
प्रकृति की इस बस्ती को बचाने की जरूरत
बया की यह कॉलोनी सिर्फ खूबसूरत नजारा नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की जैव विविधता का हिस्सा है। पेड़ों पर बने इन घोंसलों को देखने के लिए लोगों की भीड़ जरूर जुट रही है, लेकिन पक्षियों को परेशान करने या घोंसलों को नुकसान पहुंचाने से बचना जरूरी है।
एक पेड़… सैकड़ों घोंसले… और हजारों तिनकों से बुनी जिंदगी। पंडरिया में बया की यह बस्ती प्रकृति की उस खूबसूरती की कहानी कह रही है, जिसे कैमरे में कैद करने से ज्यादा जरूरी है—उसे सुरक्षित रखना




