खांसी की सिरप को अनुसूची ‘के’ से हटाने के फैसले को बताया जनस्वास्थ्य और रोगी सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कवर्धा/ब्रजेश गुप्ता
नई दिल्ली। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट (AIOCD) ने भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची ‘के’ (Schedule K) में किए गए संशोधन का स्वागत किया है। 9 जून 2026 को जारी अधिसूचना G.S.R. 477(E) के तहत अनुसूची ‘के’ के क्रमांक 13 की मद (7) से “खांसी हेतु सिरप” शब्द को हटाया गया है।
एआईओसीडी ने कहा कि संगठन लंबे समय से सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाता रहा है कि अनुसूची ‘के’ के प्रावधानों का कुछ संस्थाओं, विशेषकर ई-फार्मेसी एवं अन्य माध्यमों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। इससे औषधियों की बिक्री एवं आपूर्ति ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम तथा नियमों में निहित सुरक्षा प्रावधानों की मूल भावना के विपरीत हो रही थी।
संगठन का मानना है कि देशभर में लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के बाद चिकित्सकों एवं क्लीनिकों को अनुसूची ‘के’ के तहत दी गई औषधियों के भंडारण एवं वितरण संबंधी छूट को युक्तिसंगत एवं सीमित किया जाना आवश्यक है। एआईओसीडी ने अनुसूची ‘के’ की व्यापक समीक्षा और संशोधन को समय की आवश्यकता बताया है।
एआईओसीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे तथा महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि यह संशोधन औषधियों के उत्तरदायित्वपूर्ण वितरण को सुनिश्चित करने और पिछले वर्षों में सामने आए नियामकीय दुरुपयोग एवं खामियों को दूर करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से आग्रह किया कि नियामक प्राधिकरणों, चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट संगठनों, रोगी समूहों तथा औषधि उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों से परामर्श कर अनुसूची ‘के’ का व्यापक पुनरीक्षण किया जाए।
एआईओसीडी ने यह भी स्पष्ट किया कि औषधियों के वितरण से संबंधित किसी भी छूट का प्रमुख उद्देश्य रोगी सुरक्षा और जनस्वास्थ्य होना चाहिए। संगठन ने देशभर की अपनी सदस्य संस्थाओं को निर्देश जारी करते हुए खांसी की सिरप एवं अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री में सभी वैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।




