जिले की सबसे बड़ी हाफ नदी सूखी, अब सिर्फ रेत का मैदान; 200 गांवों पर जल संकट का खतरा

कवर्धा /ब्रजेश गुप्ता
पंडरिया। जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली हाफ नदी इस वर्ष भीषण गर्मी के कारण पूरी तरह सूख गई है। जहां कभी बहते पानी की कल-कल सुनाई देती थी, वहां अब दूर-दूर तक केवल रेत और सूखी धरती नजर आ रही है। नदी का तल पूरी तरह खाली हो चुका है और बीच धारा में लोग पैदल चलते दिखाई दे रहे हैं।
हाफ नदी पर पंडरिया क्षेत्र के करीब 200 गांव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। ग्रामीणों की निस्तारी, मवेशियों के लिए पानी, खेतों की नमी तथा आसपास के कई जल स्रोत इसी नदी से जुड़े हुए हैं। नदी के सूख जाने से गांवों में जल संकट के संकेत स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। कई स्थानों पर हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चला गया है, जबकि कुएं भी सूखने लगे हैं। इससे लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
नदी का अस्तित्व होता जा रहा कमजोर
नदी क्षेत्र का निरीक्षण करने पर चौंकाने वाले दृश्य सामने आए। नदी में पानी की जगह रेत के विशाल मैदान दिखाई दे रहे हैं। किनारों पर सूखे पत्थर और फटी हुई जमीन नदी के संकट को बयां कर रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले मई-जून तक नदी के गहरे हिस्सों में पानी बचा रहता था, जिससे मवेशियों और लोगों की जरूरतें पूरी हो जाती थीं। इस बार स्थिति पहले से अधिक गंभीर है और नदी का अस्तित्व ही संकट में नजर आ रहा है।
35 किलोमीटर लंबी है हाफ नदी
हाफ नदी का उद्गम बोड़ला ब्लॉक के दलदली और पंडरिया ब्लॉक के पंडरीपानी क्षेत्र की मैकल पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों से होता है। लगभग 35 किलोमीटर लंबी यह नदी मुख्य रूप से पंडरिया ब्लॉक में बहती है। इसके बाद यह कवर्धा, मुंगेली और बेमेतरा जिले की सीमाओं से गुजरते हुए नांदघाट के पास शिवनाथ नदी में जाकर मिलती है।
बारिश पर टिकी उम्मीदें
हाफ नदी के पूरी तरह सूख जाने के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें मानसून पर टिकी हुई हैं। लोगों का कहना है कि समय पर अच्छी बारिश होने से ही नदी में फिर से जल प्रवाह शुरू हो सकेगा और क्षेत्र के जल स्रोतों को राहत मिलेगी। फिलहाल नदी का सूना स्वरूप आने वाले दिनों में जल संरक्षण और जल प्रबंधन की आवश्यकता की ओर संकेत कर रहा है।



