वर्ल्ड रिकॉर्ड वाले पुराने सोखता गड्ढे कचरे से पटे, अब फिर से खोदे जा रहे नए गड्ढे

ब्रजेश गुप्ता | कवर्धा
जल संरक्षण के नाम पर जिले में बड़े स्तर पर चलाए गए सोखता गड्ढा अभियान की जमीनी हकीकत अब सवालों के घेरे में है। जून 2025 में जिला प्रशासन ने भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से एक लाख से अधिक सोखता गड्ढों का निर्माण कराया था। इसी अभियान के आधार पर जिले का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था।
लेकिन एक साल के भीतर ही अधिकांश गड्ढे मिट्टी और कचरे से पट चुके हैं। कई स्थानों पर इनका अस्तित्व तक खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है। इसके बावजूद पुराने गड्ढों की सफाई और रखरखाव के बजाय अब दोबारा नए सोखता गड्ढे खोदने की तैयारी शुरू हो गई है।
जिला पंचायत की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायत में 200 से 300 नए सोखता गड्ढे बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बुधवार को जिपं सीईओ अभिषेक अग्रवाल ने सहसपुर लोहारा ब्लॉक के ग्राम गांगपुर में जल संचय जन अभियान के तहत श्रमदान कर सोखता गड्ढा निर्माण में भागीदारी निभाई और ग्रामीणों के घरों में बने गड्ढों का निरीक्षण भी किया।
रखरखाव के अभाव में बदहाल हुए गड्ढे
ग्राम कुकदूर, चिल्फी और दशरंगपुर सहित कई गांवों में पिछले साल बनाए गए सोखता गड्ढे अब कचरा फेंकने की जगह बन चुके हैं। कहीं मिट्टी भर गई है तो कहीं गड्ढे पूरी तरह बंद हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के बाद पंचायत और प्रशासन ने इनके रखरखाव की ओर ध्यान नहीं दिया।
दशरंगपुर के प्राथमिक स्कूल के पास बने गड्ढों में जल संरक्षण के बजाय कचरे का ढेर नजर आया। वहीं चिल्फी में गड्ढों की हालत खराब होने से यह योजना केवल कागजों तक सीमित दिखाई दी।
रिकॉर्ड बना, फिर जिम्मेदार भूल गए
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले साल पूरा फोकस केवल रिकॉर्ड बनाने और आयोजन को सफल दिखाने पर था। रिकॉर्ड बनने और प्रमाणपत्र मिलने के बाद गड्ढों की सुध नहीं ली गई।
अब प्रशासन दोबारा नए गड्ढे बनाने की तैयारी कर रहा है। इस बार प्रत्येक गड्ढे की ऑनलाइन एंट्री और जियो टैगिंग किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब पुराने गड्ढे सुरक्षित नहीं रखे जा सके तो केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड से जल संरक्षण का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।
कुछ गांवों में बेहतर स्थिति
हालांकि कुछ गांवों में ग्रामीणों की जागरूकता के कारण सोखता गड्ढों की स्थिति अभी भी बेहतर बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित साफ-सफाई और देखरेख हो तो यह योजना उपयोगी साबित हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक 20 जून 2025 को जिले के चारों ब्लॉकों की 469 पंचायतों के 999 गांवों में कुल 1 लाख 2 हजार 98 सोखता गड्ढों का निर्माण किया गया था। इसी अभियान के दौरान हजारों लोगों ने जल संरक्षण की शपथ भी ली थी।
जिपं सीईओ अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में सभी ग्राम पंचायतों में घर-घर सोखता गड्ढा निर्माण कराया जाएगा और प्रत्येक गड्ढे की ऑनलाइन एंट्री के साथ जियो टैगिंग भी की जाएगी।





