भीषण गर्मी में दम तोड़ती सकरी नदी: करोड़ों खर्च के बावजूद जलसंकट गहराया

कवर्धा, brajesh gupta
कभी शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली सकरी नदी इन दिनों भीषण गर्मी के चलते अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई जगहों पर नदी का तल पूरी तरह सूख गया है और पानी का नामोनिशान तक नहीं बचा।
निस्तारी संकट से जूझ रहे लोग
नदी के सूखने का सीधा असर आसपास के मोहल्लों के निवासियों पर पड़ रहा है। दैनिक उपयोग और निस्तारी के लिए लोग इसी नदी पर निर्भर थे, लेकिन अब पानी के अभाव में उन्हें दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
करोड़ों खर्च, फिर भी नतीजा शून्य
चिंता की बात यह है कि सकरी नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए जिला प्रशासन द्वारा पहले ही करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हर साल गर्मी आते ही नदी सूखने लगती है, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्यों सूख रही है नदी?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
वर्षा जल का सही संचयन न होना
अवैध रेत खनन और अतिक्रमण
जलस्तर में गिरावट
योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होना
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं।
समाधान की दरकार
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के पुनर्जीवन के लिए सिर्फ बजट खर्च करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। वर्षा जल संचयन, अतिक्रमण हटाना और जनभागीदारी जैसे कदम ही इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकते हैं।





