कबीरधामकवर्धा

जनगणना, परीक्षा और मूल्यांकन एक साथ: जिले में 1000 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी, शिक्षा व्यवस्था पर दबाव

कवर्धा/पंडरिया। जिले में इस समय शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक कार्यों के एक साथ होने से शिक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। एक ओर जहां कक्षा 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षाएं और उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य जारी है, वहीं दूसरी ओर जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम ने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जिले में वार्षिक परीक्षाएं 10 अप्रैल तक संचालित होंगी। इन परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए शिक्षकों की ड्यूटी केंद्राध्यक्ष सहित विभिन्न जिम्मेदारियों में लगाई गई है। इसी बीच 23, 24 और 25 मार्च को जनगणना प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है, जिससे दोनों कार्यों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।
केंद्राध्यक्ष ही प्रशिक्षण में शामिल, बढ़ी चिंता
पंडरिया ब्लॉक सहित जिलेभर से 40 से अधिक शिक्षकों को जनगणना के मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया है। इनमें अधिकांश वे शिक्षक शामिल हैं, जो परीक्षा केंद्रों में केंद्राध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके प्रशिक्षण में जाने से परीक्षा संचालन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
परीक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
केंद्राध्यक्ष परीक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनकी जिम्मेदारी में प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा की निगरानी, उत्तरपुस्तिकाओं का संकलन और अनुशासन बनाए रखना शामिल है। उनकी अनुपस्थिति से परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने दोनों कार्यों को संतुलित ढंग से संचालित करने की चुनौती है।
1000 से अधिक कर्मचारियों की लगेगी ड्यूटी
जनगणना, परीक्षा और मूल्यांकन कार्य को मिलाकर जिले में एक हजार से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जिनमें अधिकांश शिक्षक होंगे। इससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
अभिभावकों का कहना है कि पहले से निर्धारित परीक्षाओं के बीच किसी भी प्रकार की अव्यवस्था का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से समन्वय बनाकर कार्यों को व्यवस्थित करने की मांग की है।
जनगणना राष्ट्रीय कार्यक्रम, ड्यूटी अनिवार्य
अपर कलेक्टर नरेन्द्र पैकरा ने बताया कि जनगणना एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसे केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित किया जाता है। इस कारण इसमें कर्मचारियों की ड्यूटी अनिवार्य है और फिलहाल इसकी तैयारी जारी है।
कर्मचारी क्यों कर रहे परहेज
कुछ कर्मचारी जनगणना ड्यूटी से परहेज कर रहे हैं, क्योंकि यह कार्य लंबी अवधि तक चलता है। वर्ष 2027 तक चलने वाले इस अभियान में कर्मचारियों को लगातार सेवाएं देनी होंगी। पहले चरण में घरों की गणना और बाद में व्यक्तियों की गणना की जाएगी। हालांकि इस कार्य के लिए केंद्र सरकार द्वारा अलग से मानदेय भी दिया जाता है।
निष्कर्ष:
जनगणना, परीक्षा और मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का एक साथ होना प्रशासन और शिक्षा विभाग दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है। समुचित योजना और समन्वय के बिना इसका असर सीधे छात्रों और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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