
कवर्धा। प्रदेश में अवैध अफीम की खेती के मामलों के सामने आने के बाद अब प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बलरामपुर और अन्य जिलों के बाद कबीरधाम जिले में भी विशेष जांच अभियान शुरू कर दिया गया है। राजस्व विभाग के पटवारी खेत-खेत जाकर फसलों की जांच कर रहे हैं और संदिग्ध पौधों की पहचान की जा रही है।
इस अभियान के तहत तैयार विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को भेजी जाएगी। खास बात यह है कि गिरदावरी सर्वे के बाद पहली बार दोबारा इस तरह का व्यापक निरीक्षण कराया जा रहा है।
1.30 लाख हेक्टेयर में रबी फसल
वर्तमान में जिले में लगभग 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसल ली गई है। इसमें करीब
30 हजार हेक्टेयर में चना
25 हजार हेक्टेयर में गेहूं
30 हजार हेक्टेयर में गन्ना
शेष क्षेत्र में अन्य उद्यानिकी फसलें शामिल हैं।
राजस्व विभाग के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर आमनी देवांगन ने बताया कि आयुक्त भू-अभिलेख से प्राप्त निर्देशों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिले में कहीं भी अवैध अफीम की खेती न हो। प्रमाण सहित जांच रिपोर्ट तय समय सीमा में भेजी जाएगी।
वनांचल और सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष नजर
प्रशासन ने तहसीलदारों और राजस्व टीमों को विशेष रूप से उन इलाकों में भेजा है:
जहां बाहरी लोग खेती कर रहे हैं
जो वन क्षेत्रों से सटे हुए हैं
इन क्षेत्रों में अवैध खेती की आशंका अधिक होने के कारण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके पर जाकर फसल की प्रकृति का निरीक्षण करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना प्रशासन व पुलिस को दें।
ड्रोन से निगरानी अभियान
बेमेतरा जिले में पुलिस ने निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग शुरू कर दिया है।
बड़े खेतों, फार्म हाउस और बाड़ियों की ड्रोन से जांच
दुर्गम इलाकों में भी निगरानी आसान
एएसपी हरीश कुमार यादव ने बताया कि ड्रोन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कहीं अवैध मादक पदार्थों का उत्पादन या भंडारण न हो।
बाहरी किसानों की भी जांच
प्रशासन उन किसानों की जानकारी भी जुटा रहा है जो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से आकर यहां खेती कर रहे हैं। उनकी फसलों का मैदानी सत्यापन किया जा रहा है, ताकि यह अभियान केवल औपचारिकता न बनकर प्रभावी कार्रवाई साबित हो।
जिम्मेदारी तय होगी
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी गांव या खेत में अफीम या गांजा की अवैध खेती पाई जाती है, तो संबंधित पटवारी और ग्राम स्तर के जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती को पूरी तरह रोकने के लिए यह अभियान सख्ती से जारी रहेगा।




