कबीरधामकवर्धा

नपा कवर्धा को छोड़ अन्य सभी निकायों की आबादी भूमि होगी नजूल, मिलेगा मलिकाना हक

प्रति निकाय 30 से 50 लाख रुपये तक बढ़ेगा वार्षिक राजस्व

कवर्धा। ब्रजेश गुप्ता
जिले के नगर पालिका कवर्धा को छोड़कर अन्य सभी नगर निकाय क्षेत्रों में स्थित आबादी भूमि को अब नजूल भूमि घोषित किया जाएगा। जिला राजस्व विभाग के इस फैसले से वर्षों से चली आ रही विसंगति समाप्त होगी और भूमि पर काबिज लोगों को पहली बार कानूनी मालिकाना हक मिल सकेगा। साथ ही संबंधित नगर निकायों को हर वर्ष लाखों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
अब तक इन क्षेत्रों में सरकारी भूमि को ग्राम पंचायत काल के नियमों के अनुसार आबादी माना जाता था। नगर निकाय बनने के बावजूद इसे नजूल में परिवर्तित नहीं किया गया था, जिसके कारण न तो भूमि उपयोगकर्ताओं को मालिकाना अधिकार मिल पा रहा था और न ही निकायों को अपेक्षित राजस्व प्राप्त हो रहा था। इस स्थिति से सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो रही थी।
बोड़ला से हुई शुरुआत, तीन निकाय होंगे शामिल
प्रदेश में पहली बार इस पहल की शुरुआत बोड़ला नगर पंचायत से की गई है, जहां सर्वे कार्य प्रारंभ हो चुका है। पहले चरण में बोड़ला के बाद नगर पालिका पंडरिया और नगर पंचायत पांडातराई को शामिल किया जाएगा। इन तीनों निकायों में कुल लगभग 998 एकड़ आबादी भूमि को नजूल में परिवर्तित किया जाएगा।
कलेक्टर ने बोड़ला नगर पंचायत क्षेत्र के नागरिकों से सर्वे कार्य में सहयोग करने की अपील की है, ताकि प्रक्रिया को समय पर और पारदर्शी ढंग से पूरा किया जा सके।
टैक्स में होगी बड़ी बढ़ोतरी
वर्तमान में बोड़ला नगर पंचायत की लगभग 103.74 हेक्टेयर (256 एकड़) आबादी भूमि से मात्र 46 हजार रुपये वार्षिक टैक्स प्राप्त हो रहा है। नजूल घोषित होने के बाद यह आय बढ़कर लगभग 30 लाख रुपये प्रति वर्ष होने का अनुमान है।
इसी तरह पंडरिया नगर पालिका की 195.21 हेक्टेयर तथा पांडातराई नगर पंचायत की 105.96 हेक्टेयर भूमि को भी नजूल में बदला जाएगा, जिससे इन निकायों को भी भारी राजस्व लाभ होगा।
नागरिकों को मिलेगा सीधा फायदा
भूमि के नजूल घोषित होने से वहां रह रहे लोगों को पट्टा एवं मालिकाना हक मिलेगा। इसके बाद वे अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण ले सकेंगे। इससे आवास निर्माण, व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
सर्वे जारी, पूरे जिले में लागू होगी व्यवस्था
राजस्व विभाग के अनुसार प्रथम चरण के बाद जिले के अन्य नगर पंचायतों में भी इसी मॉडल पर कार्य किया जाएगा। आबादी भूमि के नजूल में परिवर्तन से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि वर्षों से लंबित स्वामित्व संबंधी समस्याओं का भी समाधान होगा।
ग्राम पंचायतों में जारी है स्वामित्व योजना
इधर, जिले की ग्राम पंचायतों में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक से आबादी क्षेत्रों का सर्वे किया जा रहा है। अब तक लगभग 7 हजार प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में 30 हजार अधिकार अभिलेख बांटने की तैयारी है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण संपत्तियों को वित्तीय संपदा में बदलना और संपत्ति विवादों को कम करना है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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