[ad_1]देश में डिजिटल अरेस्ट स्कैम बढ़ने के बीच सरकार ने स्कैमर्स पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार 6.69 लाख से अधिक सिम कार्ड और 1,32,000 आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए हैं। देशभर में कई पीड़ितों ने ऐसे अपराधियों के जाल में फंस कर बड़ी मात्रा में धन गंवा रहें है। यह एक संगठित ऑनलाइन आर्थिक अपराध है और ऐसा माना जाता है कि इसे सीमापार आपराधिक सिंडिकेट द्वारा संचालित किया जाता है।गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि डिजिटल अरेस्ट और दूसरे साइबर अपराधों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए तंत्र को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं।अब तक 9.94 लाख से अधिक शिकायतों में 3,431 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गईकेंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब तक 9.94 लाख से अधिक शिकायतों में 3,431 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने फर्जी भारतीय नंबर से आने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉलों की पहचान करने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए एक सिस्टम तैयार किया है। कुमार ने कहा, “हाल ही में फर्जी डिजिटल अरेस्ट, फेडएक्स स्कैम, सरकारी और पुलिस अधिकारियों के रूप में कॉल आदि के मामलों में साइबर अपराधियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय नकली कॉल की गई हैं।” दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को इस तरह की आने वाली अंतरराष्ट्रीय नकली कॉलों को ब्लॉक करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।क्या है डिजिटल अरेस्ट ?आपको बता दें कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर साइबर अपराधियों द्वारा पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), नारकोटिक्स विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां का रूप धारण कर धमकी, ब्लैकमेल, जबरन वसूली और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी वारदातों को अंजाम देने के संबंध में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की जा रही हैं।कथित “केस” में समझौता करने के लिए पैसे की मांग की जाती हैये धोखेबाज आमतौर पर संभावित पीड़ित को कॉल करते हैं और कहते हैं कि पीड़ित ने कोई पार्सल भेजा है या प्राप्त किया है जिसमें अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या कोई अन्य प्रतिबंधित वस्तु है। कभी-कभी, वे यह भी सूचित करते हैं कि पीड़ित का कोई करीबी या प्रिय व्यक्ति किसी अपराध या दुर्घटना में शामिल पाया गया है और उनकी हिरासत में है। ऐसे कथित “केस” में समझौता करने के लिए पैसे की मांग की जाती है।जालसाज सरकारी कार्यालयों की तर्ज पर बनाए गए स्टूडियो का करते हैं इस्तेमालकुछ मामलों में, पीड़ितों को “डिजिटल अरेस्ट” का सामना करना पड़ता है और उनकी मांग पूरी न होने तक पीड़ित को स्काइप या अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म पर धोखेबाजों के लिए उपलब्ध रहने पर मजबूर किया जाता है। ये जालसाज़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी कार्यालयों की तर्ज पर बनाए गए स्टूडियो का उपयोग करने में माहिर होते हैं और असली दिखने के लिए वर्दी पहनते हैं।गृह मंत्रालय ने ‘इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर’ की स्थापना की हैगृह मंत्रालय ने देश में सभी तरह के साइबर अपराधों से निपटने के लिए ‘इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर’ (आई4सी) की स्थापना की है। फाइनेंशियल फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग और साइबर अपराधियों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए आई4सी के तहत ‘सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ की शुरुआत 2021 में की गई थी।आई4सी में एक साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटरआई4सी में एक साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) स्थापित किया गया है, जहां प्रमुख बैंकों, वित्तीय मध्यस्थों, भुगतान एग्रीगेटर्स, टीएसपी, आईटी मध्यस्थों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि साइबर अपराध से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई और सहयोग के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।I4C ने साइबर अपराधियों की पहचान करने वालों की एक संदिग्ध रजिस्ट्री भी शुरू कीबैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से I4C ने साइबर अपराधियों की पहचान करने वालों की एक संदिग्ध रजिस्ट्री भी शुरू की है। इसके अतिरिक्त सरकार ने ‘रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट’ नाम से एक नए फीचर की भी शुरुआत की है, जो नागरिकों को ‘सस्पेक्ट सर्च’ के जरिए साइबर अपराधियों की पहचान करने वालों के I4C के संग्रह को खोजने का ऑप्शन देता है।I4C ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जारी किए हैं अलर्टI4C ने माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से ऐसी गतिविधियों में शामिल धोखेबाजों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सिम कार्ड, मोबाइल उपकरणों और म्यूल खातों को ब्लॉक करने में भी मदद कर रहा है। I4C ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Cyberdost’ पर इन्फोग्राफिक्स और वीडियो के माध्यम से विभिन्न अलर्ट भी जारी किए हैं, जैसे कि X, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स।नागरिकों को तत्काल साइबरक्राइम हेल्पलाइन नंबर पर रिपोर्ट करनी चाहिएइसके अतिरिक्त गृह मंत्रालय नागरिकों को इस प्रकार की जालसाज़ी से सावधान रहने और इनके बारे में जागरुकता फैलाने की सलाह दी है। ऐसी कॉल आने पर नागरिकों को तत्काल साइबरक्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in पर सहायता के लिए इसे रिपोर्ट करना चाहिए। [ad_2] Source link Post navigationदस्तावेज नकली, सपने असली: फर्जी BEO बनने का ड्रामा खत्म, व्याख्याता गिरफ्तार ‘तुम भी मेरे, वो भी मेरे’: दुल्हन की दोहरी शादी की दास्तान, थाने में ‘प्रेम का महासंग्राम’, पढ़ें पूरी खबर