15 साल से पुलिया का इंतजार, 5 घंटे में ग्रामीणों ने खुद बना दी पुलिया
सरकारी व्यवस्था पर सवाल: बारिश में रास्ता बंद होने से परेशान ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाया रास्ता, बोले—अब और कितना इंतजार करें?

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कवर्धा। जिले के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस पुलिया के निर्माण का ग्रामीण पिछले 15 वर्षों से इंतजार कर रहे थे, आखिरकार उस इंतजार ने उन्हें खुद ही समाधान खोजने के लिए मजबूर कर दिया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर महज करीब 5 घंटे में श्रमदान से पुलिया तैयार कर दी।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दिनों में यहां से आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता था। रास्ते में पानी भरने और पुलिया नहीं होने के कारण ग्रामीणों, किसानों, स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ती थी। कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पुलिया निर्माण की मांग की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
जब व्यवस्था नहीं पहुंची, ग्रामीण खुद जुट गए
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से उन्हें आश्वासन मिल रहा था, लेकिन पुलिया का निर्माण नहीं हो सका। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती थी। ऐसे में ग्रामीणों ने आपस में चर्चा की और श्रमदान कर रास्ता बनाने का निर्णय लिया।
इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उपलब्ध संसाधनों से काम शुरू कर दिया। देखते ही देखते कई लोग इस काम में जुट गए और करीब पांच घंटे की मेहनत के बाद आवागमन के लिए अस्थायी पुलिया तैयार कर दी गई।
ग्रामीणों का सवाल—15 साल में नहीं बनी तो अब कब बनेगी?
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार या प्रशासन के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि अपनी रोजमर्रा की परेशानी दूर करना है। उनका सीधा सवाल है कि अगर ग्रामीण पांच घंटे में मिलकर पुलिया बना सकते हैं, तो सरकारी स्तर पर 15 साल में यह काम क्यों नहीं हो पाया?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर स्थायी और मजबूत पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि हर साल बारिश के दौरान उन्हें इसी तरह परेशानी का सामना न करना पड़े।
ग्राउंड रिपोर्ट के अहम सवाल
15 वर्षों से पुलिया निर्माण क्यों लंबित है?
क्या इस स्थान का पूर्व में सर्वे या प्रस्ताव तैयार हुआ था?
यदि प्रस्ताव बना था तो निर्माण क्यों नहीं हुआ?
बारिश में ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या प्रशासन अब ग्रामीणों द्वारा बनाई गई पुलिया का निरीक्षण करेगा?
क्या यहां स्थायी पुलिया के लिए बजट स्वीकृत किया जाएगा?
ग्रामीणों की मेहनत ने फिलहाल रास्ता खोल दिया है, लेकिन यह घटना व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ गई है—जिस काम के लिए ग्रामीणों को 15 साल इंतजार करना पड़ा, उसका स्थायी समाधान आखिर कब होगा?




