बारिश में खुली सड़क निर्माण की पोल: मिट्टी-मुरुम डालकर ठेकेदार गायब, घुटनों तक कीचड़ में चलने को मजबूर ग्रामीण

कवर्धा/पोलमी/चिल्फी घाटी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रही दो ग्रामीण सड़कों का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। बारिश शुरू होते ही सड़कें दलदल में तब्दील हो गई हैं। बैगा आदिवासी बस्तियों के लोग, स्कूली बच्चे, किसान और मरीज रोज घुटनों तक कीचड़ पार कर आने-जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार केवल मिट्टी और मुरुम डालकर काम छोड़ गया, जिससे पहली ही बारिश में सड़कें पूरी तरह खराब हो गईं।
भेड़ागढ़ से बैगा पारा तक 1.14 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण 8.38 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। निर्माण कार्य का ठेका दुर्ग की मेसर्स एनसी नाहर को दिया गया है। 25 मार्च 2026 को शुरू हुआ यह कार्य फिलहाल बंद पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि चार महीने बीत जाने के बाद भी सड़क पर न डामरीकरण हुआ और न ही अंतिम निर्माण कार्य पूरा किया गया। मानसून से पहले केवल मिट्टी और मुरुम डालने के कारण पूरी सड़क दलदल में बदल गई है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर लगाए गए सूचना बोर्ड में भी आवश्यक जानकारी अधूरी छोड़ी गई है। पुलिया निर्माण, उपयोग होने वाली सामग्री और अन्य तकनीकी विवरण वाले कॉलम खाली हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बैगा परिवारों, बच्चों और मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
यह सड़क बैगा आदिवासी बस्तियों का मुख्य संपर्क मार्ग है। रोज स्कूल जाने वाले बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज इसी रास्ते से गुजरते हैं। कीचड़ और फिसलन के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया है, जबकि दोपहिया वाहन भी जगह-जगह फंस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात में किसी मरीज को अस्पताल ले जाना पड़े तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सुपापानी मार्ग पर भी अधूरा निर्माण बना परेशानी
चिल्फी घाटी के सुपापानी गांव में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (जन-मन) के तहत बहनाखोदरा से सुपापानी तक 1.40 किलोमीटर सड़क का निर्माण 1.80 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। फरवरी 2026 में भूमिपूजन के बाद शुरू हुआ काम पांच महीने बाद भी अधूरा है।
ग्रामीणों के अनुसार ठेकेदार केवल मुरुम डालकर चला गया। लगातार बारिश से मुरुम बह गई और सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर तथा कीचड़ फैल गया। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं। कई बार वे फिसलकर गिर जाते हैं, उनके बस्ते और यूनिफॉर्म खराब हो जाते हैं, जिससे कई बच्चे बीच रास्ते से वापस घर लौट जाते हैं।
किसानों और ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
अधूरी सड़क का असर किसानों पर भी पड़ रहा है। खरीफ सीजन में खाद और बीज लाने वाले वाहन रास्ते में फंस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
अधिकारियों का पक्ष
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता संतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि कुछ स्थानों पर निजी भूमि के सीमांकन और नाप-जोख की प्रक्रिया के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। बारिश को देखते हुए ठेकेदार को तत्काल मुरुम डालकर रास्ता सुगम बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल सके




