कबीरधामकवर्धा

“250 गुड़ फैक्ट्रियां, शून्य फायर सेफ्टी: कबीरधाम में हर दिन सुलगता खतरा”

ब्रजेश गुप्ता
कवर्धा। कबीरधाम जिले में तेजी से बढ़ रहे गुड़ उद्योग अब संभावित आपदा का कारण बनते जा रहे हैं। जिले में 250 से अधिक गुड़ फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जहां हजारों टन सूखा बगास (गन्ने का अपशिष्ट) खुले में जमा रहता है। यह सामग्री अत्यधिक ज्वलनशील होती है और आग लगने का बड़ा खतरा पैदा करती है। इसके बावजूद किसी भी फैक्ट्री में फायर सेफ्टी के बुनियादी इंतजाम तक नहीं हैं।
हाल ही में पांडातराई थाना क्षेत्र के ग्राम खंडसरा स्थित एक गुड़ उद्योग में बगास में अचानक आग लग गई। सूखे बगास के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आग बुझाने के लिए मौके पर कोई संसाधन उपलब्ध नहीं था।
दमकल व्यवस्था भी कमजोर
जिले का अग्निशमन विभाग खुद संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। पांच फायर ब्रिगेड वाहन होने के बावजूद केवल तीन ड्राइवर उपलब्ध हैं, जबकि फायरमैन की संख्या भी महज 12-13 है। ऐसे में एक साथ कई जगह आग लगने पर हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।
घटना के समय पांडातराई में उपलब्ध फायर ब्रिगेड वाहन खराब था और थाना परिसर में खड़ा रहा। मजबूरी में करीब 35 किलोमीटर दूर से दमकल मंगानी पड़ी। आग बुझाने के शुरुआती 15 मिनट को ‘गोल्डन टाइम’ माना जाता है, लेकिन देरी के कारण आग पर जल्दी काबू पाने की संभावना खत्म हो गई।
आगजनी के आंकड़े बढ़ते खतरे की चेतावनी
अग्निशमन विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 250 से अधिक आगजनी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें गन्ना खेत, पुआल के ढेर और गुड़ फैक्ट्रियों में रखे बगास में आग लगने के मामले अधिक हैं। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा लगभग 200 था, यानी एक साल में करीब 25% की वृद्धि हुई है।
अस्पतालों में भी सुरक्षा इंतजाम अधूरे
स्थिति केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। जिले के छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी फायर सेफ्टी उपकरण नहीं हैं। नियमों के अनुसार अस्पतालों और बड़े संस्थानों में पिलर हाइड्रेंट सिस्टम अनिवार्य है, लेकिन पंडरिया स्वास्थ्य केंद्र में लगा सिस्टम भी खराब पड़ा है।
जिम्मेदारी को लेकर विभागों में असमंजस
अग्निशमन विभाग का कहना है कि गुड़ फैक्ट्रियों में फायर सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए उद्योग विभाग को पत्र भेजा गया है। वहीं उद्योग विभाग का कहना है कि यह जिम्मेदारी उनके दायरे में नहीं आती।
इस पूरी स्थिति ने जिले में औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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