ब्रजेश गुप्ता ग्राउंड रिपोर्ट | अधिकापुर (मैनपाट क्षेत्र) प्रदेश के “शिमला” कहे जाने वाले मैनपाट की वादियों में बसा एक छोटा-सा गांव—बिसरपानी, जिसे लोग “उल्टापानी” के नाम से भी जानते हैं। पहचान सिर्फ एक प्राकृतिक रहस्य से नहीं, बल्कि यहां की महिलाओं के साहसिक फैसलों से भी है। यहां आधा किलोमीटर तक बहने वाला नाला गुरुत्वाकर्षण के नियमों को चुनौती देता नजर आता है—पानी ढलान की ओर नहीं, बल्कि ऊंचाई की ओर बहता दिखाई देता है। बंद गाड़ियां भी मानो किसी अदृश्य ताकत से ऊपरी हिस्से की ओर खिंचती चली जाती हैं। रोजाना सैकड़ों पर्यटक इस रहस्य को अपनी आंखों से देखने पहुंचते हैं। बच्चे ढलान वाले हिस्से में कागज की नाव छोड़ते हैं, जो कुछ ही देर में “ऊपर” की दिशा में बहती नजर आती है। देश-विदेश के वैज्ञानिक भी यहां रिसर्च कर चुके हैं, लेकिन आज तक स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। रहस्य के बीच सख्त नियम: न प्लास्टिक, न नशा बिसरपानी की असली ताकत उसका प्राकृतिक चमत्कार नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं का सामूहिक निर्णय है। पर्यटन स्थल के पास दुकान चलाने वाली महिलाएं: किसी भी प्रकार का प्लास्टिक सामान नहीं बेचतीं पैकेट बंद खाद्य सामग्री से परहेज करती हैं बीड़ी, सिगरेट, गुटखा नहीं बेचतीं पर्यटकों को पर्यटन स्थल के आसपास नशा करने की अनुमति नहीं देतीं यह नियम किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि गांव की पंचायत और महिलाओं की सहमति से लागू है। इको-फ्रेंडली बाजार: पत्तों पर परोसा जाता है स्वाद यहां की दुकानों में प्लास्टिक की प्लेटें नहीं दिखतीं। खाने-पीने की चीजें पत्तों के दोने और स्थानीय बर्तनों में परोसी जाती हैं। गांव की महिलाएं: हाथ से बने इको-फ्रेंडली सामान बेचती हैं स्थानीय फल, खीरा, चना और मक्का का छोटा बाजार सजाती हैं पर्यटकों को स्वच्छता का संदेश देती हैं परिणाम—मैनपाट के सभी पर्यटन स्थलों में सबसे साफ-सुथरा स्थल आज बिसरपानी है। पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या: 670 साक्षरता दर: 51% मुख्यालय से दूरी: 61 किमी कनेक्टिविटी: अंबिकापुर से दरिमा मार्ग होते हुए मैनपाट के पास स्थित रहस्य या दृष्टिभ्रम? वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे स्थानों पर कभी-कभी “ऑप्टिकल इल्यूजन” यानी दृष्टिभ्रम के कारण ढलान ऊंचाई जैसा दिखाई देता है। हालांकि आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं है। लेकिन गांव के लिए यह सिर्फ रहस्य नहीं, रोज़गार का साधन भी है। पर्यटन से आय, प्रकृति से समझौता नहीं जहां कई पर्यटन स्थल प्लास्टिक कचरे और अव्यवस्था से जूझ रहे हैं, वहीं बिसरपानी ने उदाहरण पेश किया है—पर्यटन हो, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं। यह गांव साबित करता है कि साक्षरता दर भले 51% हो, लेकिन पर्यावरण के प्रति जागरूकता 100% है। बिसरपानी—जहां पानी भले उल्टा बहता दिखे, लेकिन सोच पूरी तरह सही दिशा में है।Post navigationएसआईआर के बाद 67 हजार नाम हटे, अब जिले में 6.03 लाख मतदाता पंचायतनामा | उल्टा पानी, सीधी सोच: बिसरपानी की महिलाओं ने बदली पर्यटन की तस्वीर