सरकारी बजट का इंतजार, नौनिहालों के खेल अब दान के भरोसे
43.57 लाख रुपए का प्रावधान, फिर भी 1743 आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं पहुंची खिलौना-शैक्षणिक सामग्री

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कबीरधाम जिले की आंगनबाड़ियों में खेल-खेल में सीखने की व्यवस्था सरकारी सप्लाई के अभाव में दान पर निर्भर होती जा रही है। जिले के 1743 आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले करीब 30 हजार बच्चों के लिए चालू सत्र में अब तक राज्य स्तर से खिलौने और शैक्षणिक सामग्री की आपूर्ति नहीं हुई है। जबकि विभागीय व्यवस्था के तहत प्रत्येक केंद्र के लिए करीब 2,000 से 2,500 रुपए तक की राशि का प्रावधान बताया जा रहा है।
2500 रुपए प्रति केंद्र के हिसाब से देखें तो 1743 केंद्रों के लिए यह राशि करीब 43 लाख 57 हजार 500 रुपए बैठती है। यानी बजट का प्रावधान होने के बावजूद बच्चों तक सामग्री नहीं पहुंच पाई है।
सरकारी व्यवस्था की जगह अब ‘सेवा संकल्प’
सप्लाई नहीं पहुंचने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब ‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए आम लोगों से खिलौने दान करने की अपील शुरू की है। विभाग का कहना है कि इसका असर भी दिखा है और अब तक करीब 200 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए खिलौने प्राप्त हो चुके हैं।
लेकिन जिले के कुल 1743 केंद्रों की तुलना में 200 केंद्रों तक सामग्री पहुंचना यह सवाल भी खड़ा करता है कि बाकी केंद्रों में बच्चों की जरूरत कैसे पूरी होगी।
30 हजार बच्चे सीधे प्रभावित
जिले की आंगनबाड़ियों में करीब 80 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें लगभग 50 हजार बच्चे तीन वर्ष से कम उम्र के हैं, जबकि करीब 30 हजार बच्चे तीन से छह वर्ष की आयु के हैं, जो नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों में आते हैं।
इन्हीं बच्चों के लिए खिलौने और शैक्षणिक सामग्री खेल-आधारित प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में लंबे समय तक सामग्री उपलब्ध नहीं होने से केंद्रों में बच्चों की गतिविधियां प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
अक्टूबर में शहरों से खिलौने जुटाए जाएंगे
विभाग ने अब शहरी क्षेत्रों में घर-घर और बाजारों से खिलौने जुटाने के लिए विशेष अभियान की तैयारी की है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 1 अक्टूबर को कवर्धा, 3 अक्टूबर को पिपरिया व इंदौरी, 5 अक्टूबर को पांडातराई व पंडरिया तथा 6 अक्टूबर को बोड़ला व सहसपुर लोहारा में खिलौना संग्रह अभियान चलाया जाएगा।
सवाल: बजट है तो सप्लाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए खिलौने और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था और बजट पहले से निर्धारित है, तो चालू सत्र में राज्य स्तर से अब तक आपूर्ति क्यों नहीं हुई?
एक ओर सरकार बच्चों के शुरुआती वर्षों में खेल-आधारित शिक्षा पर जोर देती है, वहीं दूसरी ओर जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को खिलौनों के लिए नागरिकों से दान मांगना पड़ रहा है। ऐसे में ‘दान से व्यवस्था’ और ‘बजट से व्यवस्था’ के बीच का अंतर सवालों के घेरे में है।
अधिकारी का पक्ष
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी आनंद तिवारी ने बताया कि वर्तमान सीजन के लिए राज्य स्तर से खिलौना सामग्री की आपूर्ति नहीं हुई है। बच्चों को खिलौनों की कमी न हो, इसलिए सेवा संकल्प अभियान के तहत नागरिकों से खिलौने दान करने की अपील की जा रही है। अब तक करीब 200 केंद्रों के लिए खिलौने प्राप्त हो चुके हैं।





