318 स्कूलों में शौचालय नहीं, 65 भवन जर्जर: कबीरधाम में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, 2,475 शिक्षकों के पद भी खाली

कवर्धा। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ सरकारी स्कूलों में बेहतर व्यवस्थाओं के दावों के बीच कबीरधाम जिले की जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। जिले के 1,608 सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है। कई स्कूलों में अब तक विद्यार्थियों को नई यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं, जबकि 318 स्कूल ऐसे हैं जहां शौचालय की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। इससे विशेष रूप से छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
जिले में शिक्षा व्यवस्था केवल संसाधनों की कमी से ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की भारी कमी से भी जूझ रही है। कुल 6,391 स्वीकृत शिक्षक पदों के मुकाबले केवल 3,916 शिक्षक कार्यरत हैं। यानी 2,475 पद रिक्त हैं। वहीं प्राचार्यों के 1,606 स्वीकृत पदों में से 172 पद अभी भी खाली हैं, जिससे स्कूलों के संचालन और शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
65 स्कूल भवन जर्जर, हादसे का खतरा
जिले के 65 स्कूल भवन अति जर्जर श्रेणी में हैं। कई भवनों में दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्राम बहना खोदरा के प्राथमिक स्कूल भवन में चौड़ी दरारों के कारण बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्राथमिक कक्षाएं मिडिल स्कूल भवन में संचालित की जा रही हैं।
देवरी स्कूल बना तालाब
ग्राम देवरी के सरकारी स्कूल में नई सड़क स्कूल परिसर से ऊंची बनने के कारण बारिश का पानी सीधे कक्षाओं में भर जाता है। बाउंड्री वॉल में भी कई जगह दरारें आ चुकी हैं, जिससे भवन के ढहने का खतरा बना हुआ है और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरम्मत के लिए मिलता है बजट, फिर भी हाल बेहाल
सरकारी प्रावधानों के अनुसार 49 तक छात्र संख्या वाले स्कूलों को प्रतिवर्ष 25 हजार रुपये तथा 50 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों को 50 हजार रुपये रखरखाव, शौचालय मरम्मत, सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए दिए जाते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
डीईओ बोले— शासन को भेजी जा चुकी है जानकारी
जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने बताया कि जिले के 65 जर्जर स्कूल भवनों की जानकारी शासन को पहले ही भेजी जा चुकी है। इस वर्ष 11 नए स्कूल भवन स्वीकृत हुए हैं और उनका निर्माण जल्द शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों को मिलने वाली राशि का उपयोग आवश्यक कार्यों में किया जाता है तथा जर्जर भवनों के संबंध में शासन को लगातार पत्राचार किया गया है।



