कबीरधामकवर्धा

जंगलों में आग पर सख्ती: पूरे जिले में फायर अलर्ट, 10 संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी

कवर्धा  ।।  जिले के लगभग 1547 वर्ग किलोमीटर में फैले वन क्षेत्र को आग से बचाने के लिए वन विभाग ने इस वर्ष फायर सीजन में पूरे जिले को अलर्ट मोड पर रखा है। पिछले वर्ष जंगलों में आग की सबसे अधिक घटनाएं दर्ज हुई थीं, इसलिए इस बार विभाग ने पहले से ही व्यापक तैयारी की है।
पिछले वर्ष 2025 में लगभग 397 आगजनी की घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिससे हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था। इसी को देखते हुए 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन में निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था मजबूत की गई है। अब तक इस सीजन में केवल 6 घटनाएं सामने आई हैं, जिसे विभाग अपनी रणनीति का परिणाम मान रहा है।
वन विभाग ने जिले के 153 बीटों में एक-एक फायर वॉचर की तैनाती की है। इन्हें कैम्पा फंड से नियुक्त किया गया है। जंगलों में निगरानी के लिए अस्थायी झोपड़ियां भी बनाई गई हैं, ताकि फायर वॉचर दिनभर क्षेत्र में मौजूद रहकर तुरंत आग पर काबू पा सकें।
एक ही दिन तीन जगह आग की घटना
9 मार्च को एक ही दिन तीन अलग-अलग स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सामने आईं। इनमें कवर्धा रेंज के बोड़ला बीट में दो स्थान और पंडरिया पश्चिम रेंज के कुकदूर बीट में एक स्थान शामिल है। इसके अलावा चिल्फी रेंज के मछियाकोना और रेंगाखार रेंज के बोदलपानी में भी आग लगने की घटनाएं पहले दर्ज हो चुकी हैं। समय रहते वन कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पा लिया।
तेंदूपत्ता सीजन में बढ़ता है खतरा
वन विभाग के अनुसार तेंदूपत्ता तोड़ाई के दौरान आग लगने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इसे रोकने के लिए जिले की 19 लघु वनोपज समितियों के प्रबंधकों के साथ कार्यशाला आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि शाखाओं की कटाई जड़ सहित की जाए, ताकि सूखी झाड़ियों में आग फैलने की संभावना कम हो।
खराब ब्लोअर मशीनें सुधारी गईं
जंगलों में आग बुझाने के लिए विभाग के पास 80 ब्लोअर मशीनें उपलब्ध हैं। इनमें से लगभग 40 मशीनें खराब थीं, जिन्हें फायर सीजन से पहले मरम्मत कर फिर से चालू कर दिया गया है। इससे आग बुझाने के काम में तेजी आई है।
10 वर्षों के आंकड़ों से चिन्हित हुए संवेदनशील स्थान
वन विभाग ने पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर ऐसे 10 से अधिक स्थान चिन्हित किए हैं, जहां करीब 40% आग की घटनाएं होती रही हैं। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक और जनजागरण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
सैटेलाइट से निगरानी, कंट्रोल रूम से तुरंत अलर्ट
जिले में फायर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। सैटेलाइट आधारित एमआईएस सिस्टम के जरिए जैसे ही किसी जंगल में आग का संकेत मिलता है, संबंधित वन अधिकारी और बीट प्रभारी को मैसेज और फोन के माध्यम से तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। इसके बाद टीम मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने में जुट जाती है।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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