छत्तीसगढ़ में भी तेज हुआ यूजीसी के खिलाफ विरोध, शिक्षकों-छात्रों ने जताई नाराज़गी
स्वर्ण के व्याख्यान के दौरान उठा मुद्दा, शिक्षा नीतियों में बदलाव की मांग
कवर्धा / रायपुर -: छत्तीसगढ़ में अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नीतियों के खिलाफ विरोध के स्वर तेज़ होने लगे हैं। राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक और छात्र संगठन खुलकर सामने आ रहे हैं और हालिया प्रस्तावों को लेकर असंतोष जता रहे हैं।
इसी कड़ी में राजधानी में आयोजित एक शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान शिक्षाविद् स्वर्ण के व्याख्यान में भी यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों पर गंभीर चर्चा हुई। व्याख्यान के दौरान स्वर्ण ने कहा कि वर्तमान नीतियां उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। उन्होंने छात्रों से जागरूक रहने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों ने भी आशंका जताई कि प्रस्तावित बदलावों से नियमित नियुक्तियों पर असर पड़ेगा और संविदा आधारित व्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे शिक्षा का व्यावसायीकरण बढ़ेगा और आम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा और कठिन हो जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि यूजीसी अपने फैसलों पर पुनर्विचार करे और सभी हितधारकों से व्यापक संवाद के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। आने वाले दिनों में प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की रणनीति भी बनाई जा रही है।





