
कवर्धा /चित्फीघाटी / ब्रजेश गुप्ता
इतन आदिमजाति सेवा सहकारी समिति चिल्फी में वर्ष 2018 की अल्पकालीन कृषि ऋण माफी योजना में हुए कथित घोटाले में अब नए गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। आरोप है कि आर्थिक अनियमितताओं के बावजूद सहायक प्रबंधक मनोज चंद्राकर ने अपना पूरा वेतन नियमित रूप से लिया, जबकि समिति में कार्यरत अन्य कर्मचारियों का करीब 7 लाख रुपए वेतन कई वर्षों से लंबित है।
इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि मनोज चंद्राकर का नाम ऋण माफी सूची में दर्ज है, जबकि उनके नाम पर कृषि भूमि नहीं है, जिससे विभागीय मिलीभगत व राजनीतिक संरक्षण की आशंका और गहरी हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार समिति में किसानों के बकाया भुगतान के लिए बैंक से राशि भेजी जा चुकी थी, लेकिन किसानों को आज तक धनराशि नहीं मिली। समिति में कार्यरत किसान घनश्याम, सम्हारो, मिनका धीरज, संतोषी, सुकावो बाई व अन्य का कहना है कि वे वर्षों से चक्कर काट रहे हैं, पर उनका वैधानिक हक नहीं मिल रहा।
समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल, गैस एजेंसी का पैसा निजी उपयोग में खर्च होने का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि समिति से जुड़ी गैस एजेंसी की राशि को निजी कार्य में खर्च किया गया, जिसके चलते एजेंसी में घाटा हुआ और उसे बंद करना पड़ा। इससे क्षेत्र में घरेलू गैस जैसी बुनियादी सुविधा प्रभावित हुई।
पूर्व कर्मचारी लिपिक जगत दास, जितेंद्र पाली व लोकेंद्र प्रसाद यदु ने बताया कि शुरू में उन्हें वेतन मिलता था, लेकिन घोटाला सामने आने के बाद भुगतान बंद कर दिया गया। परिणामस्वरूप कर्मचारियों का लगभग 7 लाख रुपये बकाया है।
वर्तमान प्रबंधक प्रदीप साहू का कहना है कि उनके कार्यकाल में सहायक प्रबंधक को कोई भुगतान नहीं किया गया है। अन्य कर्मचारियों का वेतन जांच लंबित होने के कारण रोका गया है।
सरकारी योजना का ट्रक कबाड़ में बदला
शासन द्वारा बहुउद्देशीय योजना के तहत समिति को दिया गया ट्रक उचित रखरखाव के अभाव में कबाड़ में बदल चुका है। यह ट्रक किसानों की आय बढ़ाने व परिवहन सुविधा के लिए दिया गया था, परंतु लापरवाही व कुप्रबंधन से योजना असफल रही।
स्थानीय किसानों व कर्मचारियों का आरोप है कि ऋण माफी फर्जीवाड़ा, मृत किसानों के नाम ऋण, फर्जी समूह बनाकर राशि निकासी, ट्रक लेन-देन में अनियमितता, बचत खातों में हेराफेरी व राशि बैंक शाखा में जमा न करने जैसे कई घोटाले हुए हैं, पर शिकायतों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
जिम्मेदारों की प्रतिक्रिया
अधिकारी आर.पी. मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच जारी है और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।





