प्रेस भवन विवाद में आमने-सामने आए दो पक्ष, पत्रकारों के अधिकार और हिसाब-किताब पर उठे सवाल
मरम्मत और सुविधाओं के बाद भवन के उपयोग को लेकर घमासान; वर्तमान अध्यक्ष ने पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कवर्धा। जिला प्रेस क्लब का प्रेस भवन इन दिनों पत्रकारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विवाद अब केवल भवन के ताले या उसके उपयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ पारदर्शिता, सुविधाओं के इस्तेमाल और पत्रकार संगठन की जवाबदेही जैसे सवाल भी जुड़ गए हैं। वर्तमान अध्यक्ष यशवंत सिंह ठाकुर ने पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा और डी.एन. योगी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रेस भवन को जिले के सभी पत्रकारों के लिए उपलब्ध कराने की पैरवी की है।
अध्यक्ष की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, नई कार्यकारिणी ने प्रेस भवन की मरम्मत कराकर वहां बिजली, पानी, इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। कार्यकारिणी का दावा है कि इसका उद्देश्य पत्रकारों को एक ऐसा स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे बैठकर समाचार तैयार करने और अन्य पत्रकारिता संबंधी गतिविधियों को संचालित कर सकें।
भवन पर अधिकार से ज्यादा महत्वपूर्ण उपयोग का सवाल
प्रेस भवन विवाद के बीच सबसे अहम सवाल यह है कि इसका उपयोग किन शर्तों पर और किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा। वर्तमान अध्यक्ष का कहना है कि प्रेस भवन जिले के सभी पत्रकारों के हित में होना चाहिए। उनका सवाल है कि जब भवन का उपयोग व्यापक पत्रकार समुदाय के लिए किया जा सकता है, तो इसे लेकर विवाद क्यों हो रहा है?
हालांकि, भवन के संचालन, प्रवेश और उपयोग से संबंधित नियमों तथा दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
किराये की राशि का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
अध्यक्ष यशवंत सिंह ठाकुर ने प्रेस भवन से संबंधित किराये की राशि के हिसाब-किताब पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूर्व अध्यक्ष पर लाखों रुपये की राशि के गबन का आरोप लगाया है। यह आरोप फिलहाल अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड, रसीदें, बैंक विवरण और अन्य दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी।
यदि भवन से किराये के रूप में आय होती रही है, तो उसकी प्राप्ति और खर्च का स्पष्ट विवरण सामने आना विवाद के कई पहलुओं को समझने में मदद कर सकता है। इस मामले में संबंधित पूर्व पदाधिकारियों का पक्ष भी सामने आना जरूरी है।
नई कार्यकारिणी ने सुविधाएं बढ़ाने का किया दावा
वर्तमान कार्यकारिणी के मुताबिक, प्रेस भवन की मरम्मत कराकर उसे पत्रकारों के काम के अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है। बिजली, पानी, इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं इसी पहल का हिस्सा बताई गई हैं।
कार्यकारिणी का कहना है कि भवन का उपयोग पत्रकारों के सामूहिक हित में होना चाहिए। हालांकि, सुविधाओं के संचालन, रखरखाव और उपयोग की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नियम होने से भविष्य में विवाद की आशंका कम हो सकती है।
हनुमान संकीर्तन के आयोजन का भी किया उल्लेख
वर्तमान कार्यकारिणी ने प्रेस भवन में हनुमान संकीर्तन के आयोजन का भी उल्लेख किया है। अध्यक्ष के अनुसार, कार्यक्रम में पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यकारिणी का कहना है कि प्रेस भवन को पत्रकारों की गतिविधियों के साथ सामाजिक आयोजनों के लिए भी उपयोगी बनाया जा सकता है।
वेबसाइट पर प्रकाशित खबरों को लेकर भी आपत्ति
अध्यक्ष की विज्ञप्ति में डी.एन. योगी की समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित कुछ खबरों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप लगाया गया है कि स्थानीय घटनाओं और दुर्घटनाओं से संबंधित खबरों में उपमुख्यमंत्री की तस्वीर का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है। अध्यक्ष ने इसे प्रेस भवन विवाद से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, खबरों में तस्वीरों के इस्तेमाल और प्रेस भवन विवाद के बीच किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में संबंधित वेबसाइट का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
ताला तोड़ने और हाईकोर्ट के मामले में दस्तावेज अहम
प्रेस भवन का ताला तोड़ने के आरोप और हाईकोर्ट में प्रस्तुत मामले को लेकर भी विवाद सामने आया है। अध्यक्ष की विज्ञप्ति में न्यायालय में गलत तथ्यों और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों के बिना नहीं की जा सकती।
मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए न्यायालय में दायर याचिका, संबंधित आदेश, हस्ताक्षरों से जुड़े दस्तावेज और भवन के स्वामित्व अथवा संचालन संबंधी रिकॉर्ड का परीक्षण जरूरी है। न्यायालय की कार्यवाही और लागू नियमों के अनुरूप ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी?
प्रेस भवन विवाद में पारदर्शिता लाने के लिए भवन के उपयोग के नियम, किराये की आय और खर्च का विवरण, मरम्मत पर हुए व्यय, पूर्व एवं वर्तमान कार्यकारिणी के अधिकार तथा न्यायालय में चल रहे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आना जरूरी है।
प्रेस भवन पत्रकारों के हित में किस तरह संचालित होगा, इसका निर्णय आरोप-प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेजों, स्पष्ट नियमों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर होना चाहिए।




