कबीरधामकवर्धा

40 लाख खर्च, हरियाली गायब: चार साल में उजड़ गए ‘कृष्ण कुंज’, जिम्मेदारी पर टकराव

5निकायों में लगाए गए 1500 पौधे सूखे; प्रति पौधा 2600 रुपए खर्च के बावजूद मैदान जैसे हाल

कवर्धा। बृजेश गुप्ता

कवर्धा सहरों में हरियाली बढ़ाने और धार्मिक महत्व वाले पौधों के संरक्षण के उद्देश्य से वर्ष 2022 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुरू की गई ‘कृष्ण कुंज’ योजना अब बदहाली का शिकार हो चुकी है। जिले के कवर्धा, पंडरिया, सहसपुर लोहारा, बोड़ला और पांडातराई में करीब 40 लाख रुपए खर्च कर 1500 से अधिक पौधे लगाए गए थे, लेकिन चार साल बाद अधिकांश स्थानों पर पौधे सूख चुके हैं और कई जगह जमीन खाली मैदान जैसी नजर आ रही है।
इन परियोजनाओं में प्रति पौधा करीब 2600 रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद खराब है। कई जगह सूखी झाड़ियां, टूटी जालियां और बंद पड़ी पाइपलाइनें देखी जा सकती हैं। पंडरिया, बोड़ला और सहसपुर लोहारा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है।
शराबखोरी का अड्डा बना पहला कृष्ण कुंज
शहर के समनापुर मार्ग पर बने पहले कृष्ण कुंज में करीब 12 लाख रुपए खर्च कर लगभग 500 पौधे लगाए गए थे। यहां पीपल, बरगद, कदंब, नीम, बेल, आंवला और जामुन जैसे पौधे लगाए गए थे, साथ ही फेंसिंग और पाथवे भी बनाया गया था।
लेकिन अब हालात यह हैं कि गेट पर लगा ताला जंग खा चुका है और अंदर झाड़ियां उग आई हैं। देखरेख के अभाव में यह स्थान शराबखोरी का अड्डा बन गया है।
पांडातराई में भी नहीं सुधरे हालात
पांडातराई के वार्ड-14 स्थित शीतला मंदिर के पास करीब 300 पौधे लगाए गए थे। जाली और सीमांकन होने के बावजूद वर्षों से यहां कोई कर्मचारी निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा, जिससे पौधों की स्थिति खराब हो चुकी है।
बोड़ला में पुराने पेड़ ही बचे
बोड़ला के विल्फी रोड पर करीब 8 लाख रुपए की लागत से विकसित कृष्ण कुंज में अब केवल पुराने पेड़ ही दिखाई देते हैं। नए लगाए गए पौधे सूख चुके हैं। पानी की पाइपलाइन बंद पड़ी है और गेट पर अक्सर ताला लगा रहता है। अंदर का क्षेत्र सूखी झाड़ियों से भरा हुआ है।
पंडरिया और लोहारा में भी पौधे नष्ट
सहसपुर लोहारा और पंडरिया में बनाए गए कृष्ण कुंज की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां 15 लाख रुपए से अधिक खर्च किए गए, लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो चुके हैं।
जिम्मेदारी तय नहीं, देखरेख ठप
योजना के तहत पौधरोपण तो किया गया, लेकिन रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं हो पाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि महीनों से कोई अधिकारी या कर्मचारी निरीक्षण के लिए नहीं आया।
निर्माण के बाद परियोजना को नगरीय निकायों को सौंपना था, लेकिन हैंडओवर नहीं होने के कारण देखरेख ठप पड़ी है।
विवादित जमीन भी बनी वजह
इस मामले में संबंधित अधिकारियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर कृष्ण कुंज विवादित जमीन पर बनाए गए हैं, जिसके कारण नगर पालिका ने हैंडओवर लेने से इनकार किया है। मामला न्यायालय में लंबित होने की बात भी सामने आई है।
आगे क्या?
अधिकारियों के अनुसार, योजना को लेकर फिलहाल शासन से कोई नया निर्देश नहीं मिला है। भविष्य में शासन स्तर पर जो निर्णय होगा, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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