ग्राउंड रिपोर्ट | सीजीएन न्यूज़ चूहे नहीं, सिस्टम खा गया 22 हजार क्विंटल धान! फटी बोरियों के नीचे दबा 7 करोड़ का सच, कवर्धा में हिला प्रशासन

कवर्धा | सीजीएन न्यूज़ ब्रजेश गुप्ता
ग्राम आजार–चारभाठा स्थित धान संग्रहण केंद्र आज किसी आपदा स्थल जैसा नजर आता है। चारों ओर फटी बोरियां, सड़ा हुआ धान और भूसे के ढेर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सिस्टम फेलियर हुआ है। यही वह केंद्र है, जहां से खरीफ विपणन वर्ष 2024–25 में करीब 22 हजार क्विंटल धान गायब हो गया। बाजार कीमत के हिसाब से यह घोटाला करीब 7 करोड़ रुपए का बैठता है।
आंकड़े जो प्रशासन की नींद उड़ा दें
जिले के 108 खरीदी केंद्रों से वर्ष 2024–25 में लगभग 64 लाख टन धान खरीदा गया।
बाजार चारभाठा संग्रहण केंद्र: 6.50 लाख टन
बघर्रा संग्रहण केंद्र: 1.50 लाख टन
पूरा उठाव होने के बाद
बघर्रा केंद्र में 3%,
बाजार चारभाठा केंद्र में 3.55% धान शॉर्टेज पाया गया।
कुल मिलाकर यह आंकड़ा 22 हजार क्विंटल तक पहुंच गया। सवाल सीधा है—
क्या इतना धान चूहे, दीमक और सूखत खा सकते हैं?
शिकायतें समय पर, कार्रवाई नाम की नहीं
सितंबर 2025 में ही दोनों संग्रहण केंद्रों को लेकर 23–24 बिंदुओं की लिखित शिकायत की जा चुकी थी।
शिकायत में गेट पास, स्टॉक रजिस्टर, सुरक्षा व्यवस्था, परिवहन और कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
लेकिन अफसरों की चुप्पी ने गड़बड़ी को और गहरा कर दिया।
3.5 करोड़ सुरक्षा पर खर्च, फिर भी धान गायब!
नियमों के मुताबिक प्रति क्विंटल धान की सुरक्षा पर 5 रुपए खर्च होते हैं।
दोनों केंद्रों में मिलाकर करीब 80 लाख क्विंटल धान स्टॉक था।
यानी सिर्फ सुरक्षा पर 3.5 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए।
फिर भी 22 हजार क्विंटल धान गायब—तो सवाल उठता है कि
सुरक्षा धान की थी या घोटाले की?
“चूहे खा गए” बयान से भड़का बवाल
मामला सामने आते ही जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) का बयान आया—
धान को चूहे, दीमक और कीड़े खा गए।
इस बयान ने आग में घी डाल दिया। विपक्ष ने इसे घोटाले को ढंकने की कोशिश बताया।
7 जनवरी को कार्यकर्ताओं ने डीएमओ कार्यालय का घेराव किया और तंज कसते हुए
चूहों के लिए पिंजरे तक भेंट कर दिए।
सस्पेंशन हुआ, लेकिन जांच अब भी अधर में
चारभाठा संग्रहण प्रभारी प्रीतेश पांडेय सस्पेंड
डीएमओ को कारण बताओ नोटिस
4 सदस्यीय जांच समिति गठित
लेकिन हकीकत यह है कि
अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई,
और कई अहम दस्तावेज आज भी गायब हैं।
सूखत के पुराने आंकड़े भी शक के घेरे में
प्रशासन ने पिछले वर्षों के आंकड़े गिनाए—
2020–21: 3.9%
2021–22: 3.67%
2024–25: 3.5%
विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में शॉर्टेज को केवल सूखत बताना गुमराह करने वाला तर्क है।
सीधी बात
डीएमओ, कबीरधाम
“बघर्रा केंद्र में 3% और बाजार चारभाठा में 3.55% धान शॉर्टेज मिला है।
जांच टीम बनी है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।”
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ धान के नुकसान का नहीं, बल्कि
सरकारी तंत्र की जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी पर सीधा सवाल है।
जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती,
तब तक कवर्धा का यह सवाल गूंजता रहेगा—
धान को चूहे नहीं, सिस्टम खा गया।





