
ग्राउंड रिपोर्ट –ब्रजेश गुप्ता
चिल्फी। चिल्फी-रेंगाखार सड़क निर्माण कार्य को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह सड़क चुनावी वादों में शामिल रही है, लेकिन सुधार व निर्माण को लेकर जब भी उम्मीद जगी, प्रक्रिया या तो रुकी रह गई या फिर कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही हैं।
गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जर्जर और उखड़ी हुई पुरानी सड़क को हटाए बिना सीधे उसी पर डामर बिछा दिया गया है। कुछ ही स्थानों पर पैचवर्क नजर आता है, वहीं जहाँ नया डामर डाला गया है वहां भी जगह-जगह सड़क उखड़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में निम्न स्तरीय गिट्टी और डामर का उपयोग किया गया है जिससे सड़क लंबे समय तक नहीं टिक पाएगी।
विभागों के बीच तालमेल की कमी
ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग, लोक निर्माण विभाग और प्रशासन के बीच तालमेल की कमी के कारण सालों तक सड़क सुधार कार्य रुका रहा। अब जब काम शुरू हुआ है, तब भी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सही तरीके से प्लानिंग और निगरानी होती तो सड़क फिर से विवाद का विषय न बनती।
कार्यवाही की मांग
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच, उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की टेस्टिंग तथा जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बिना गुणवत्ता जांच के भुगतान न किया जाए और निर्माण स्थल पर नियमित निरीक्षण अनिवार्य किया जाए।
विभाग का पक्ष
लोक निर्माण विभाग बोड़ला के एसडीओ सचिन शर्मा ने बताया कि निर्माण कार्य नियम अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर जगह पुरानी सड़क निकालना जरूरी नहीं होता, तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर ही काम किया जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग है कि विकास कार्य चुनावी वादों तक सीमित न रहे, बल्कि ज़मीन पर गुणवत्ता के साथ उतरे ताकि आने-जाने में आसानी हो और क्षेत्र को स्थायी रूप से बेहतर सड़क सुविधा मिल सके। फिलहाल, मामले ने स्थानीय स्तर पर बहस को तेज कर दिया है और अब निगाहें प्रशासनिक जांच व आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।




