उर्वरक की मात्रा निर्धारित कर विक्रेता का चयन कर सकेंगे। टोकन और क्यूआर कोड जनरेट होने के बाद किसान खाद प्राप्त कर पाएंगे।
एफएफएस एप पर किसानों को दर्ज करना होगा जमीन और बोई गई फसल का विवरण, सहकारी समिति या निजी विक्रेता चुनने की मिलेगी सुविधा

कवर्धा, 7 नवंबर। किसानों को रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जिले में उर्वरक वितरण को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (एफएफएस) प्रणाली लागू कर दी गई है। इसके तहत अब किसानों को खाद लेने के लिए मोबाइल एप से टोकन जनरेट करना होगा। टोकन के साथ मिलने वाले क्यूआर कोड के माध्यम से ही उर्वरक का वितरण किया जाएगा। जिले के सभी विकासखंडों में इस नई प्रणाली के तहत उर्वरक का उठाव भी प्रारंभ हो गया है।
जमीन और फसल की जानकारी दर्ज करना अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत किसानों को एफएफएस मोबाइल एप पर अपनी कृषि भूमि का रकबा और बोई गई फसल का विवरण दर्ज करना होगा। इसके बाद किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की मात्रा निर्धारित कर विक्रेता का चयन कर सकेंगे। टोकन और क्यूआर कोड जनरेट होने के बाद किसान खाद प्राप्त कर पाएंगे।
समिति या निजी दुकान, किसान की पसंद
इस व्यवस्था की खास बात यह है कि किसान अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी सहकारी समिति अथवा निजी उर्वरक विक्रेता का चयन कर सकेंगे। इससे खाद लेने के लिए किसानों को एक ही स्थान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
कालाबाजारी पर लगेगी लगाम
डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उर्वरक की मांग, उपलब्धता, निर्धारित दर पर बिक्री और वितरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज होगा। इससे खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और अनियमित वितरण पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी।
उप संचालक कृषि ने बताया कि नई प्रणाली लागू करने का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों की आवश्यकता के अनुरूप समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना और वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम एवं व्यवस्थित बनाना है।



