नक्शे में उलझीं खेतों की सीमाएं, 200 से ज्यादा खसरों की मैपिंग में गड़बड़ी का आरोप

सीजीएन न्यूज़ | कवर्धा
कवर्धा। सहसपुर लोहारा तहसील के ग्राम खैरा में डिजिटल क्रॉप सर्वे की जीआईएस मैपिंग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां 200 से अधिक खसरों की सीमाएं नक्शे में एक ही जगह उलझी हुई दिखाई दे रही हैं। कहीं सीमाओं की रेखाएं एक-दूसरे को काट रही हैं, तो कहीं खेतों का नक्शा जाल जैसा नजर आ रहा है। ऐसे में डिजिटल सर्वे की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, 13 अक्टूबर से पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। इसके चलते निजी सर्वेयरों के माध्यम से खेतों और फसलों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर सही तरीके से सर्वे नहीं होने के कारण नक्शे में गड़बड़ी हुई है। हालांकि, इसकी वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
जिले में 92,630 खसरों की मैपिंग बाकी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 तक कबीरधाम जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम 96.78 प्रतिशत पूरा बताया गया है। वहीं, जिले के कुल 98,977 धान खसरों में से केवल 6,347 का ही पॉलीगॉन जनरेशन हुआ है, जबकि 92,630 खसरों की जीआईएस मैपिंग बाकी है। जिले के 18 गांवों में सर्वे शुरू नहीं हो सका है, जबकि 8,662 प्लॉट सर्वे करने में असमर्थ श्रेणी में दर्ज हैं।
धान खरीदी के समय बढ़ सकती है परेशानी
धान खरीदी के दौरान किसानों के पंजीयन, फसल और रकबे का मिलान किया जाता है। यदि डिजिटल सर्वे और राजस्व रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो किसानों को सत्यापन और रिकॉर्ड सुधार के लिए परेशान होना पड़ सकता है। इसलिए संदिग्ध खसरों का दोबारा भौतिक सत्यापन कर त्रुटियों को समय रहते सुधारना जरूरी है।
पीवी ऐप की समस्याएं दूर करने की मांग
पटवारी संघ पीवी ऐप की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन के सामने सर्वे पूरा कराने के साथ उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की चुनौती है।
एसडीएम बोले—त्रुटियों की पहचान कर रहे हैं
सहसपुर लोहारा के एसडीएम महेश सिंह राजपूत ने बताया कि ग्राम खैरा में जिन खसरों में त्रुटियां हैं, उनकी पहचान की जा रही है। संबंधित किसानों और कोटवार से संपर्क कर सुधार कराया जा रहा है।





