90 साल पुरानी सरोधा बांध की मुख्य नहर पर संकट
अवैध मुरुम खनन और हैवी ट्रकों के दबाव से पड़ी दरारें, 9 हजार से अधिक किसानों की सिंचाई व्यवस्था खतरे में

ब्रजेश गुप्ता
कवर्धा। जिले के 9 हजार से अधिक किसानों की जीवनरेखा मानी जाने वाली सरोधा बांध की मुख्य नहर इन दिनों गंभीर खतरे का सामना कर रही है। ग्राम तारो और भागूटोला में निजी भूमि पर हो रहे अवैध मुरुम खनन के चलते नहर की संरचना कमजोर होती जा रही है। नहर पार मार्ग से प्रतिदिन 50 से अधिक भारी ट्रकों का आवागमन हो रहा है, जबकि इस मार्ग पर भारी वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध है।
लगातार दबाव के कारण लगभग दो किलोमीटर के दायरे में छह से अधिक स्थानों पर बड़ी दरारें उभर आई हैं। यदि समय रहते मरम्मत और रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो आगामी खरीफ सीजन में 7 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित हो सकती है। इससे हजारों किसानों की फसल दांव पर लगने की आशंका है।
1936 में हुआ था बांध का निर्माण
सरोधा बांध का निर्माण वर्ष 1936 में हुआ था। 30.15 एमसीएम जल क्षमता वाले इस बांध की कुल सिंचाई क्षमता 10,200 हेक्टेयर है। वर्तमान में लगभग 7,355 हेक्टेयर क्षेत्र सीधे तौर पर इससे लाभान्वित हो रहा है। गर्मी के मौसम में 16 गांवों को निस्तारी के लिए भी इसी बांध से पानी उपलब्ध कराया जाता है।
मुख्य नहर की लंबाई 39 किलोमीटर और सहायक नहरों की कुल लंबाई 83 किलोमीटर है। कुल 9,348 किसान इस सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में नहर की दीवारों में आई दरारें केवल संरचनात्मक क्षति नहीं, बल्कि पूरे कृषि तंत्र के लिए खतरे का संकेत हैं।
किसानों में बढ़ी चिंता
ग्राम तारो, भागूटोला और आसपास के किसानों का कहना है कि यदि नहर क्षतिग्रस्त होती है तो खरीफ सीजन में धान की बुआई प्रभावित होगी। किसान संदीप देवांगन ने बताया कि पिछले वर्ष समय पर पानी मिलने से अच्छी फसल हुई थी, लेकिन इस बार नहर ही सुरक्षित नहीं रही तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों ने थाना, खनिज विभाग और जिला प्रशासन में लिखित शिकायत दी है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि खनन माफिया प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठा रहे हैं।
प्रतिबंध के बावजूद जारी है परिवहन
ग्रामीणों के अनुसार मुरुम खनन स्थल से ट्रकों को निकालने के लिए नहर पार मार्ग का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नहर की संरचना जल प्रवाह के अनुरूप बनाई जाती है, न कि 20 से 30 टन वजनी ट्रकों का भार सहने के लिए। लगातार भारी वाहनों के गुजरने से मिट्टी और कंक्रीट पर दबाव बढ़ा है, जिससे दरारें चौड़ी हो सकती हैं।
यदि रिसाव बढ़ा या बरसात के दौरान कटाव हुआ तो नहर टूटने की आशंका भी बन सकती है।
प्रशासन ने कही कार्रवाई की बात
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता मनोज पराते ने बताया कि नहर पार में भारी वाहनों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित है। पूर्व में लोहे के एंगल लगाकर मार्ग को रोका गया था, लेकिन उन्हें भी तोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई खनिज विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है।
जिला खनिज अधिकारी ने भी अवैध मुरुम खनन स्थल पर टीम भेजकर कार्रवाई करने की बात कही है।
फिलहाल, किसानों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाला खरीफ सीजन हजारों परिवारों के लिए संकट लेकर आ सकता



