
कवर्धा -: । छात्र नेता मेहुल सत्यवंशी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट आम जनता के लिए नहीं, बल्कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के करीबी उद्योगपतियों और चुनिंदा वर्गों के हितों को साधने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में युवा, बेरोजगार छात्र, किसान, मजदूर और महिलाओं के लिए कोई ठोस राहत या नई प्रभावी योजना नजर नहीं आती।
मेहुल सत्यवंशी ने कहा कि देश का युवा वर्ग गंभीर बेरोजगारी से जूझ रहा है, लेकिन बजट में न तो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की स्पष्ट रणनीति दिखती है और न ही सरकारी भर्तियों को लेकर कोई ठोस रोडमैप सामने आया है। उनके अनुसार बेरोजगार छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार की उदासीनता साफ झलकती है।
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों पर चिंता जताते हुए कहा कि इन मदों में लगातार कटौती की प्रवृत्ति यह संकेत देती है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को प्राथमिकता नहीं दे रही। पहले से संसाधन संकट से जूझ रहे सरकारी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अस्पतालों पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा।
किसानों के मुद्दे पर मेहुल सत्यवंशी ने कहा कि आय दोगुनी करने के दावों के बावजूद समर्थन मूल्य, कर्ज माफी, सिंचाई, खाद-बीज और डीज़ल सब्सिडी जैसे बुनियादी सवालों पर बजट कमजोर साबित हुआ है। बढ़ती लागत और फसल के उचित दाम न मिलने से परेशान किसानों के लिए कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी-कर्मचारी वर्ग के लिए भी बजट में कोई नई प्रभावी पहल नहीं है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन वेतन, भत्तों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार की चुप्पी चिंताजनक है।
अंत में मेहुल सत्यवंशी ने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने का बजट है। उनका आरोप है कि सरकार अमीरों के हितों को तरजीह देती है, न कि आम आदमी की जरूरतों को। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और छात्र संगठन इस जनविरोधी बजट के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहेंगे और आम जनता व छात्रों के हक़ में संघर्ष जारी रहेगा




