कबीरधामकवर्धा

रेंगाखार-चिल्फी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई: एंबुलेंस बेकार, डॉक्टरों की भारी कमी

कबीरधाम। जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र रेंगाखार और चिल्फी घाटी में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद खराब हो गई है। करीब 60-70 गांवों की जीवनरेखा माने जाने वाले रेंगाखार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जरूरी संसाधन, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
9 महीने में सिर्फ 15 बार चली एंबुलेंस
क्षेत्र की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए 1 जुलाई 2025 को डिप्टी सीएम विजय शर्मा द्वारा रेंगाखार पीएचसी को एक नई एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते यह एंबुलेंस पिछले 9 महीनों में महज 15 बार ही उपयोग में लाई गई। पिछले 2 महीनों से यह पूरी तरह खड़ी है।
एंबुलेंस के संचालन में सबसे बड़ी समस्या ड्राइवर और डीजल की व्यवस्था को लेकर सामने आई है। ड्राइवर को मात्र 4200 रुपए मासिक भुगतान किया जा रहा था, जिससे उसने काम छोड़ दिया। विभाग ने न तो नया ड्राइवर नियुक्त किया और न ही ईंधन की व्यवस्था की।
बाइक एंबुलेंस भी बेकार पड़ी
दुर्गम और पहाड़ी इलाकों के लिए दी गई बाइक एंबुलेंस भी बोक्करखार में लंबे समय से अनुपयोगी हालत में खड़ी है। जानकारी के अनुसार, टेंडर अवधि समाप्त होने के कारण इसका संचालन बंद कर दिया गया है।
डॉक्टर और स्टाफ की भारी कमी
रेंगाखार और चिल्फी पीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं है। स्टाफ की स्थिति भी बेहद खराब है—
केवल 3 नर्सें पदस्थ, जिनमें से एक अनुपस्थित
ड्रेसर, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन के पद खाली
शेष नर्सों पर 24 घंटे ड्यूटी का दबाव
इमरजेंसी में निजी वाहनों का सहारा
जिला मुख्यालय से लगभग 70 किमी दूर स्थित इस क्षेत्र में एंबुलेंस के बंद रहने से मरीजों को इमरजेंसी में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार मरीजों की हालत गंभीर होने पर समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
जहर सेवन मामले में उजागर हुई व्यवस्था
हाल ही में ग्राम महली घाट की 30 वर्षीय महिला द्वारा जहर सेवन करने का मामला सामने आया। परिजन जब उसे चिल्फी पीएचसी लेकर पहुंचे, तो वहां न डॉक्टर मौजूद था और न पर्याप्त स्टाफ। प्राथमिक उपचार के बाद महिला को 60 किमी दूर बोड़ला रेफर करना पड़ा।
ट्रॉमा सेंटर की मांग तेज
रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर स्थित चिल्फी घाटी में हर महीने औसतन 15-17 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। बावजूद इसके यहां ट्रॉमा सेंटर की सुविधा नहीं है। स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से चिल्फी पीएचसी को 50 बिस्तरों वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या ट्रॉमा सेंटर में अपग्रेड करने की मांग कर रहे हैं।

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Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

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