
कवर्धा। भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य को वन्यजीव पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में वन विभाग ने नई पहल शुरू की है। प्रस्तावित जंगल सफारी के साथ अभयारण्य में 30 चीतलों को लाने की योजना तैयार की गई है। इन चीतलों को बारनवापारा अभयारण्य से ट्रांसपोर्ट कर भोरमदेव लाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने उच्च कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया है।
वन अधिकारियों के अनुसार चीतलों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले सफारी रूट, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को पूरी तरह तैयार किया जाएगा, ताकि उनका नए वातावरण में सुरक्षित अनुकूलन हो सके और पर्यटकों को वन्यजीवों का बेहतर अनुभव मिल सके।
भोरमदेव अभयारण्य की अधीक्षक अनिता साहू ने बताया कि वर्तमान में भी अभयारण्य क्षेत्र में चीतलों की संख्या पर्याप्त है और समय के साथ इसमें वृद्धि हो रही है। प्रस्तावित जंगल सफारी लगभग 36 किलोमीटर लंबे सर्किल रूट पर संचालित की जाएगी। इसकी एंट्री करियाआमा से होगी, जहां से सफारी रूट सरकी कछार, टेडगासाले और बकोदा होते हुए दुरदुरी तक जाएगा। इस मार्ग पर सैलानियों को जंगल और वन्यजीवों के रोमांचक दृश्य देखने को मिलेंगे।
जंगल सफारी की शुरुआत तीन जिप्सी वाहनों से की जाएगी, जिन्हें वाइल्ड लाइफ सफारी के अनुरूप विशेष रूप से मॉडिफाई किया जा रहा है। इनमें से एक जिप्सी मॉडिफाई होकर पहुंच भी चुकी है। भविष्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत और वाहन जोड़े जाने की योजना है।
इस पहल से भोरमदेव अभयारण्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी विकसित होने की उम्मीद है।





