
कवर्धा, ग्राउंड रिपोर्ट। ब्रजेश गुप्ता
शहर में सिटी बस सेवा पूरी तरह बंद होने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कभी 10 सिटी बसों के सहारे चलने वाला कवर्धा का सार्वजनिक परिवहन तंत्र अब ठप हो चुका है। बसें कंडम घोषित होने के बाद नई बसों की व्यवस्था नहीं हो सकी, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों, मजदूरों, कर्मचारियों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ा है।
निजी बसों पर बढ़ी निर्भरता, किराया दोगुना तक
सिटी बस सेवा बंद होने के बाद यात्रियों को मजबूरन निजी बसों और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। पोंडी, बोड़ला और पिपरिया जैसे प्रमुख रूटों पर यात्रा करने वाले लोगों का कहना है कि पहले जहां सिटी बस से कम किराए में सफर संभव था, वहीं अब निजी बसों में अधिक किराया देना पड़ रहा है।
स्थानीय यात्रियों के अनुसार, कुछ रूटों पर किराया लगभग दोगुना तक बढ़ गया है। रोजाना आने-जाने वाले विद्यार्थियों और मजदूरों के मासिक खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
विद्यार्थियों और मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर
शहर के कॉलेज और स्कूलों में पढ़ने वाले ग्रामीण छात्र-छात्राओं को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। पहले सिटी बस से नियमित और किफायती सफर संभव था, लेकिन अब उन्हें निजी बसों के अनियमित समय और अधिक किराए का सामना करना पड़ रहा है।
दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि बढ़े हुए किराए के कारण उनकी दैनिक आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। कई मजदूरों को काम के अवसर छोड़ने तक की नौबत आ रही है।
प्रशासन की चुप्पी, नई व्यवस्था की प्रतीक्षा
शहरवासियों का कहना है कि सिटी बस सेवा बंद होने के बाद अब तक कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। नई बसों की खरीदी या परिवहन व्यवस्था के संबंध में स्पष्ट घोषणा नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नई सिटी बसों की व्यवस्था की जाए या फिर किफायती सार्वजनिक परिवहन का विकल्प उपलब्ध कराया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
निष्कर्ष
कवर्धा में सिटी बस सेवा बंद होना केवल परिवहन समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असर का विषय बन चुका है। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका प्रभाव शिक्षा, रोजगार और दैनिक जीवन पर और गहरा हो सकता है।




