राजपूत क्षत्रीय समाज कबीरधाम ने दो सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
कवर्धा।
राजपूत क्षत्रीय समाज छत्तीसगढ़, जिला कबीरधाम द्वारा समाज के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।
समाज के पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि यूजीसी द्वारा 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए चार नए नियम सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ हैं। उनका आरोप है कि दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली सर्वदलीय संसदीय समिति ने उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने के नाम पर ऐसे प्रावधान किए हैं, जिससे सवर्ण विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
समाज का कहना है कि नियमों का सेक्शन–3 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता तथा व्यक्तिगत आज़ादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इससे सामान्य वर्ग के विद्यार्थी स्वघोषित अपराधी की श्रेणी में आ जाएंगे। पदाधिकारियों ने इसे वोट बैंक की राजनीति का परिणाम बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
इसके साथ ही राजपूत क्षत्रीय समाज ने प्रयागराज प्रशासन द्वारा ज्योतिष्पीठाधीश शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के साथ किए जा रहे कथित दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की। समाज ने मांग की कि उत्तर प्रदेश शासन-प्रशासन शीघ्र शंकराचार्य जी से संवाद कर उन्हें पूर्ण सम्मान प्रदान करे। इस मांग पर भी कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से दोनों मुद्दों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।


