
ब्रजेश गुप्ता, कवर्धा / कबीरधाम
कबीरधाम के हरे-भरे भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में जल्द ही जंगल सफारी शुरू होने जा रही है। यह पहला मौका होगा जब पर्यटक जिप्सी के माध्यम से 36 किलोमीटर लंबे सर्किल रूट पर प्राकृतिक जंगल, पहाड़ों और नदी के बीच घूमते हुए वन्यजीवों को लाइव देखने का अनुभव ले सकेंगे। प्रशासन इसे जिले के पर्यटन विकास के लिए एक बड़ा कदम मान रहा है।
करियाआमा से होगी सफारी की एंट्री
अभयारण्य की अधीक्षक अनिता साहू के अनुसार सफारी के पहले चरण में करियाआमा एंट्री प्वाइंट से एक ही रूट प्रारंभ किया जाएगा। यह मार्ग सरकी कछार, टेडगासाले, बकोदा होते हुए दुरदुरी तक जाएगा। जंगल बेहद गहरा और पहाड़ी है, इसलिए रास्तों की मरम्मत का कार्य जनवरी 2026 में पूरा होने की संभावना बताई जा रही है।
जंगल के अंदर की नमी, पत्तों की हल्की सरसराहट और जगह–जगह बहती छोटी धाराएं यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को जीवंत बनाती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह इलाका पहले से ही वन्यजीवों की सक्रियता के लिए जाना जाता है।
नदी किनारे बनेगा रिवर साइट रिफ्रेशमेंट प्वाइंट
करियाआमा रूट में नदी किनारे एक रिवर साइट रिफ्रेशमेंट प्वाइंट तैयार किया जा रहा है। यहां पर्यटक सफारी के दौरान कुछ देर रुककर न सिर्फ प्रकृति का आनंद ले सकेंगे, बल्कि आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। माना जा रहा है कि यह स्थान परिवार और बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
100 से अधिक गौर की मौजूदगी, दूसरे रूट पर भी तैयारी
भोरमदेव सेंचुरी में वर्तमान में करीब 100 इंडियन बायसन (गौर) पाए जाने का अनुमान है, जो सफारी का मुख्य आकर्षण बन सकते हैं।
दूसरे चरण में जामुनपानी रूट को खोला जाएगा। बांधा बैरियर से प्रवेश के बाद सफारी बरकोला घाट व्यू प्वाइंट, बकोदा और कोकदा होते हुए प्रतापगढ़ तक जाएगी। इस क्षेत्र में हिरण, कोटरी, सांभर और गौर देखने की संभावनाएं अधिक बताई जा रही हैं।
शुरुआत तीन जिप्सी से, आगे बढ़ेगी संख्या
जंगल सफारी संचालन के लिए वर्तमान में तीन जिप्सी खरीदी जा रही हैं, जिन्हें सफारी के अनुरूप मॉडिफाई किया जा रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर पीपीपी मॉडल के तहत वाहनों की संख्या और सुविधाओं में बढ़ोतरी की योजना है।
स्थानीय लोगों और पर्यटन व्यवसायियों में उम्मीद है कि सफारी शुरू होने के बाद क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भोरमदेव सेंचुरी छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में नई पहचान बनाएगी।
जल्द ही भोरमदेव के जंगलों में गूंजती जिप्सी की आवाज़ और पर्यटकों के कैमरों की क्लिक सुनाई देने वाली है—प्रकृति के बीच रोमांच अब बस कुछ कदम दूर।





