कबीरधामकवर्धा

कवर्धा के CGIT इंजीनियरिंग कॉलेज में न रेगुलर प्रोफेसर, न प्रिंसिपल — संसाधनों की कमी से जूझ रहा संस्थान

सी जी ऐन न्यूज़। ब्रजेश गुप्ता
कवर्धा-:   शिक्षा सत्र 2025–26 में आईआईटी की तर्ज पर शुरू किए गए cg Institute of Technology (CGIT) इंजीनियरिंग कॉलेज में अब तक एक भी रेगुलर प्रोफेसर और प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हो पाई है। यह Kawardha जिले का एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज है, जहां बी-टेक की तीन शाखाओं में पढ़ाई संचालित की जा रही है। फिलहाल कॉलेज ग्राम महराजपुर स्थित पॉलिटेक्निक भवन में चल रहा है और बी-टेक की कक्षाएं पॉलिटेक्निक के शिक्षकों के भरोसे जारी हैं।
पॉलिटेक्निक में वर्ष 2007–08 से डिप्लोमा इंजीनियरिंग की तीन शाखाएं—कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन तथा इलेक्ट्रिकल—चल रही हैं, जिनके लिए रेगुलर शिक्षक उपलब्ध हैं। वहीं CGIT के लिए प्रबंधन ने केवल चार पार्ट-टाइम प्रोफेसरों की भर्ती की है, जिन्हें प्रति क्लास 800 रुपये का भुगतान किया जाता है। रेगुलर फैकल्टी और पर्याप्त संसाधनों के अभाव का असर दाखिलों पर भी पड़ा है।
सीटें खाली, दाखिलों पर पड़ा असर
बी-टेक की तीन शाखाओं में कुल 180 सीटें हैं, जिनमें से अब तक केवल 56 भरी जा सकी हैं, जबकि 124 सीटें रिक्त हैं। इसी तरह पॉलिटेक्निक की तीन शाखाओं की 90 सीटों में से 65 खाली हैं। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि संसाधनों की कमी और स्टाफ की अनुपलब्धता के कारण विद्यार्थियों का रुझान प्रभावित हुआ है।
कॉलेज के नाम से भी बना भ्रम
बी-टेक में प्रवेश व्यापमं की पीईटी (प्री-इंजीनियरिंग टेस्ट) मेरिट के आधार पर हुआ, बावजूद इसके सरकारी कॉलेज होने के बाद भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहीं। इसकी एक वजह काउंसिलिंग के दौरान कॉलेज के नाम के आगे “गवर्नमेंट” शब्द का उल्लेख न होना बताया जा रहा है। CGIT जैसे मिलते-जुलते नाम वाले निजी कॉलेजों के कारण विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति बनी और कई छात्र इस कॉलेज का चयन नहीं कर पाए।
1.50 करोड़ की स्वीकृति, खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा
पॉलिटेक्निक व CGIT के प्रभारी प्राचार्य के अनुसार संसाधनों के लिए 1.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और खरीदी हेतु शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। बी-टेक प्रथम सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरे सेमेस्टर के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। CGIT का सेटअप आ चुका है, लेकिन रेगुलर स्टाफ की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। फिलहाल पार्ट-टाइम फैकल्टी और पॉलिटेक्निक के प्राध्यापकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है।
सी जी ऐन इनसाइट
कॉलेज की शुरुआत के बाद शासन ने निर्माण और संसाधनों के लिए कुल तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं—जिसमें 1.50 करोड़ भवन और 1.50 करोड़ संसाधनों के लिए निर्धारित हैं। स्वीकृति को चार माह से अधिक हो चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। कॉलेज के लिए सात एकड़ सरकारी भूमि आरक्षित है, जिसमें से वर्तमान में चार एकड़ पर भवन और मैदान हैं, जबकि आसपास की तीन एकड़ भूमि पर कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन को दी जा चुकी है।

Advertisement Advertisement 2

Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button