*कवर्धा-बेमेतरा | 11 अप्रैल 2026* मिडिल स्कूलों की वार्षिक परीक्षा इस बार ‘कॉपी-पेस्ट’ के खेल में उलझ गई। कबीरधाम, दुर्ग, धमतरी, बालोद और बलरामपुर — इन पांच जिलों में कक्षा 6वीं और 7वीं के हजारों बच्चों ने एक ही प्रश्न पत्र पर अपनी किस्मत आजमाई।*कागज पर नियम, जमीन पर खेल* लोक शिक्षण संचालनालय ने 4 फरवरी को सख्त फरमान जारी किया था: हर जिला अपना पेपर खुद बनाएगा। मगर हकीकत इससे कोसों दूर निकली। कई जिलों ने मेहनत से किनारा कर दूसरे जिले का पेपर उठाया और हूबहू छाप दिया। न सवाल बदले, न जवाब। बस जिले का नाम बदल गया।*तीन बार बजी खतरे की घंटी* यह खेल एक बार नहीं, तीन-तीन बार दोहराया गया। – *30 मार्च*: 6वीं, 7वीं गणित और हिंदी का पर्चा कई जिलों में सेम टू सेम। – *2 अप्रैल*: 6वीं संस्कृत, 7वीं अंग्रेजी का पेपर फिर एक जैसा। – *10 अप्रैल*: 6वीं अंग्रेजी, 7वीं सामाजिक विज्ञान में भी वही कहानी।जब तीन अलग तारीखों पर एक ही पेपर सामने आए तो सिस्टम खुद बेनकाब हो गया।*नतीजा किसके सिर?* सबसे बड़ा नुकसान उन बच्चों का हुआ जिनके पास पहले से दूसरे जिले का पेपर पहुंच चुका था। उन्होंने तैयार जवाबों से परीक्षा दे डाली। शिकायतें हुईं, ज्ञापन सौंपे गए, पर जांच समिति का अब तक अता-पता नहीं।जिला शिक्षा अधिकारियों का तर्क है कि पेपर सेट कर प्रिंट के लिए दिया था, मगर दूसरे जिलों ने उसी को अपना बना लिया। उधर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डी. रमेश चंद्रवंशी ने इसे ‘सॉफ्टकॉपी का खेल’ बताते हुए कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच की मांग ठोक दी है।फिलहाल सवाल हवा में है: जब नियम सबके लिए एक थे तो पर्चे पांच जिलों में एक क्यों?Post navigationनए बस स्टैंड पर फोकस, ऑटो-टैक्सी व्यवस्था होगी व्यवस्थित समाचार: