
कवर्धा।
कबीरधाम जिले में जिला पंचायत सीईओ सहित करीब 10 विभागों में स्थायी अधिकारियों की पदस्थापना नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभारी संस्कृति के भरोसे चल रही है। स्थिति यह है कि कई अधिकारियों को एक साथ दो से तीन जिलों या विभागों का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इसका सीधा असर विभागीय कामकाज की गति और गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
लंबे समय से नियमित अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण आम जनता को अपने छोटे-बड़े कामों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। फरियादियों के मामलों का समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
जिले में होमगार्ड विभाग का प्रभार दुर्ग में पदस्थ अधिकारी के पास है। उद्यानिकी विभाग बेमेतरा से संचालित हो रहा है। पंजीयन कार्यालय का जिम्मा भी बाहरी जिले के अधिकारी के पास है, जिनके पास एक से अधिक जिलों का चार्ज है। श्रम विभाग में स्थिति और गंभीर है—दुर्ग में पदस्थ श्रम अधिकारी को बालोद, दुर्ग और कवर्धा तीनों जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।
जनपद पंचायत स्तर पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। लोहरा जनपद में एपीओ को सीईओ का प्रभार दिया गया है, वहीं बोड़ला जनपद पंचायत का संचालन भी प्रभारी व्यवस्था से हो रहा है। पशु चिकित्सा विभाग में नियमित अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो वर्तमान में अवकाश पर हैं। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, खेल विभाग जैसे अहम विभाग भी प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं।
इन कार्यों पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर
प्रभारी व्यवस्था के चलते होमगार्ड विभाग में भर्ती, प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़े समन्वय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उद्यानिकी विभाग में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी, पौध वितरण और उद्यान विकास योजनाओं की निगरानी कमजोर पड़ी है। पंजीयन कार्यालय में दस्तावेज सत्यापन और प्रकरणों के निराकरण में देरी हो रही है।
श्रम विभाग में श्रमिक पंजीयन, निर्माण श्रमिकों को सहायता, फैक्ट्री निरीक्षण और विवाद निपटारे प्रभावित हैं। जिला पंचायत और जनपद पंचायतों में विकास कार्यों की समीक्षा, भुगतान प्रक्रिया, पंचायत निरीक्षण और योजनाओं की मॉनिटरिंग भी सुस्त पड़ गई है। ग्रामीण यांत्रिकी और खेल विभाग की योजनाएं भी समय पर आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
प्रभारी अधिकारी नहीं दे पा रहे पर्याप्त समय
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि प्रभारी अधिकारी अपने मूल पदस्थापन स्थल के कामों में ही व्यस्त रहते हैं। अतिरिक्त प्रभार वाले जिले या विभाग को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिसका सीधा असर किसानों, श्रमिकों, खिलाड़ियों और पंचायतों पर पड़ता है।
सीईओ की पदस्थापना में भी देरी
जिला पंचायत सीईओ के स्थानांतरण के बाद दुर्ग से नए सीईओ की पदस्थापना की गई है, लेकिन वर्तमान में एसआईआर का कार्य चलने के कारण उनके कवर्धा आने में देरी हो रही है। संभावना जताई जा रही है कि फरवरी के बाद ही वे कार्यभार संभाल पाएंगे। तब तक प्रभारी सीईओ के रूप में अपर कलेक्टर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शासन से मांग की है कि जिले में लंबे समय से चली आ रही प्रभारी संस्कृति को समाप्त कर जल्द से जल्द नियमित अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि विकास कार्यों और जनहित से जुड़े मामलों में तेजी लाई जा सके।





