
कवर्धा।
जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन धान के समय पर उठाव और परिवहन की समुचित व्यवस्था नहीं होने से कई उपार्जन केंद्रों में गंभीर जाम की स्थिति बन गई है। इसका सीधा असर किसानों के साथ-साथ समिति कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है।
विकासखंड कवर्धा अंतर्गत सेवा सहकारी समिति खपरी–झलमला में धान खरीदी लगभग पूरी हो चुकी है। केवल दो–तीन किसानों से करीब 1000 क्विंटल धान खरीदी शेष है। समिति में अब तक 1207 किसानों से कुल 63,165.60 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इसके मुकाबले मिलर्स द्वारा मात्र 7,730 क्विंटल और संग्रहण केंद्र द्वारा केवल 12,493.94 क्विंटल धान का उठाव किया गया है, जो कुल खरीदी की तुलना में बेहद कम है।
इसी का परिणाम है कि वर्तमान में केंद्र परिसर में लगभग 42,941 क्विंटल धान जाम पड़ा हुआ है, जबकि खपरी उपार्जन केंद्र की निर्धारित बफर लिमिट केवल 7,200 क्विंटल है। यानी केंद्र में क्षमता से लगभग छह गुना अधिक धान जमा हो चुका है।
समिति प्रबंधक राकेश चंद्रवंशी ने बताया कि केंद्र में चारों ओर बारदाने और धान के ढेर लगे हुए हैं, जिससे नए किसानों को समिति कार्यालय तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है। अत्यधिक भंडारण के कारण कर्मचारियों को दिन-रात रखवाली करनी पड़ रही है। यदि शीघ्र उठाव नहीं हुआ तो सूखत और अन्य नुकसान की आशंका भी बढ़ जाएगी।
अब तक किसानों को नगद भुगतान के रूप में 9 करोड़ 99 लाख 33 हजार 166 रुपए दिए जा चुके हैं, जबकि ऋण वसूली के रूप में 4 करोड़ 97 लाख 91 हजार 908 रुपए का समायोजन किया गया है। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 14 करोड़ 97 लाख 25 हजार रुपए की धान खरीदी हो चुकी है।
इधर, बफर लिमिट से कई गुना अधिक धान जमा होने के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न तो मिलर्स के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए गए हैं और न ही परिवहन एजेंसियों पर कोई सख्ती दिखाई दे रही है। विभागीय उदासीनता के चलते समिति प्रबंधन और कर्मचारी लगातार दबाव में काम कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि धान का शीघ्र उठाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि केंद्रों पर बनी जाम की स्थिति समाप्त हो और किसानों व कर्मचारियों को राहत मिल सके।





