निजी गुड़ फैक्ट्रियों की चिमनियों से फैल रहा जहरीला धुआं, जनस्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

कवर्धा -: क्षेत्र में संचालित सैकड़ों निजी गुड़ फैक्ट्रियां पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बनती जा रही हैं। इन फैक्ट्रियों की ऊंची चिमनियों से निकलने वाला काला और जहरीला धुआं आसपास के इलाकों को प्रदूषित कर रहा है। नियमों के अनुसार गुड़ फैक्ट्रियों को पर्यावरण विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश इकाइयों में इसका पालन नहीं किया जा रहा। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है और सभी फैक्ट्रियों की व्यापक जांच की मांग उठ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। कई फैक्ट्रियां रिहायशी इलाकों के बीच संचालित हो रही हैं, जिससे हालात और भी चिंताजनक हो गए हैं।
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक नितेश दुबे ने बताया कि वे हाल ही में जिले में पदस्थ हुए हैं। सभी गुड़ फैक्ट्रियों की जानकारी एकत्र की जाएगी। नियमों के तहत पर्यावरण विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट होगी।
गुड़ के नाम पर शीरा निर्माण, लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन
शासन से जिन फैक्ट्रियों को गुड़ निर्माण का लाइसेंस मिला है, वे वास्तविकता में शीरा (लिक्विड मोलासिस) का निर्माण कर रही हैं। यह लाइसेंस की शर्तों का सीधा उल्लंघन है और खाद्य सुरक्षा व बाजार व्यवस्था के लिए भी खतरा माना जा रहा है। प्रशासनिक निरीक्षण के अभाव में फैक्ट्री संचालक मनमानी कर रहे हैं।
इसके साथ ही फैक्ट्रियों में मजदूरों की बुनियादी सुविधाओं की भी अनदेखी की जा रही है। शुद्ध पेयजल, शौचालय, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा इंतजाम जैसे जरूरी प्रावधान कई जगहों पर नदारद हैं।
बाहरी मजदूरों को लेकर बढ़ी असुरक्षा की चिंता
ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई है कि अधिकांश फैक्ट्रियों में उत्तर प्रदेश और बिहार से आए मजदूर काम कर रहे हैं। आरोप है कि इन मजदूरों का पुलिस सत्यापन और पंजीकरण नहीं कराया जाता, जिससे क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियों और अपराध की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों की मांग है कि सभी फैक्ट्रियों में कार्यरत मजदूरों का पूरा विवरण थाने में अनिवार्य रूप से जमा कराया जाए।
किसानों का भुगतान अटका, करोड़ों रुपये बकाया
किसानों की बड़ी शिकायत यह है कि कई गुड़ फैक्ट्री संचालक गन्ना खरीदने के बाद भुगतान किए बिना फरार हो जाते हैं। बीते वर्ष कई किसानों के करोड़ों रुपये अब तक लंबित हैं। किसानों ने मांग की है कि फैक्ट्री लाइसेंस जारी करते समय शासन द्वारा कम से कम तीन माह की अग्रिम राशि जमा कराना अनिवार्य किया जाए, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरण, श्रम और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तथा दोषी फैक्ट्री संचालकों पर कड़ी कार्रवाई हो।


