शहर में बेडौल ब्रेकर, वाहन चालकों की बढ़ी मुश्किलें, दुर्घटना का डर

कवर्धा | कवर्धा शहर की मुख्य सड़कों और गलियों में बनाए गए बेडौल और अमानक ब्रेकर वाहन चालकों के लिए मुसीबत का सबब बनते जा रहे हैं। ये ब्रेकर न तो मानक ऊंचाई के हैं और न ही इन पर सफेद पट्टियां या रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं। नतीजतन, खासकर रात के समय ये ब्रेकर दिखाई नहीं देते और अचानक सामने आने पर वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं।गांवों में यह स्थिति हैं कि पक्की मकान बनाते है। और बची हुई कांक्रीट से रातों रात ब्रेकर का निर्माण कर देते है स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में बिना किसी तकनीकी सर्वे के मनमाने ढंग से ब्रेकर बना दिए गए हैं। इससे दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ चारपहिया और भारी वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुमित बाजार, जिला प्रेस क्लब और बिलासपुर रोड बना हादसों का केंद्र
शहर के सुमित बाजार के सामने, जिला प्रेस क्लब के पास और बिलासपुर रोड पर डीएफओ कार्ड कार्यालय के सामने बने ब्रेकर विशेष रूप से खतरनाक साबित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन ब्रेकरों की ऊंचाई अधिक है और उन पर किसी तरह की चेतावनी पट्टी या साइन बोर्ड नहीं लगे हैं। इसी कारण इन स्थानों पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें वाहन क्षतिग्रस्त होने के साथ लोगों को चोटें भी आई हैं।
रात में बढ़ जाता है खतरा
रात के समय सड़क पर पर्याप्त रोशनी न होने और ब्रेकरों पर सफेद पट्टी न होने के कारण वाहन चालकों को ब्रेकर का अंदाजा नहीं लग पाता। अचानक ब्रेकर से टकराने पर वाहन उछल जाता है, जिससे संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
शहरवासियों और वाहन चालकों ने नगर पालिका और यातायात विभाग से मांग की है कि सभी ब्रेकरों की जांच कर उन्हें मानक के अनुरूप बनाया जाए। साथ ही, ब्रेकरों पर सफेद पट्टियां, रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं, ताकि दुर्घटनाओं पर लगाम लग सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान देता है, या फिर शहरवासी यूं ही इन खतरनाक ब्रेकरों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेंगे।म



