कवर्धा में गुड़ फैक्ट्रियों का धुआं बना वायु प्रदूषण की बड़ी वजह, प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल

कवर्धा।
कवर्धा जिले में इन दिनों 300 से अधिक गुड़ फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जहां गन्ने की पेराई जोरों पर है। लेकिन इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं अब जिले में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या बनता जा रहा है। गुड़ निर्माण के दौरान निकलने वाले धुएं में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन कणों के साथ-साथ अन्य हानिकारक गैसें शामिल होती हैं, जो आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।
गन्ने का रस निकालने के बाद बची हुई खोई (छिलके) को ईंधन के रूप में जलाया जाता है। इसके जलने से भारी मात्रा में धुआं निकलता है। नियमों के अनुसार फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए फिल्टर और ऊंची चिमनियां होना अनिवार्य है, लेकिन जिले की अधिकांश गुड़ फैक्ट्रियों में न तो उचित फिल्टर लगे हैं और न ही मानक ऊंचाई की चिमनियां बनाई गई हैं। नतीजतन, धुआं सीधे वातावरण में फैलकर आसपास के गांवों और बस्तियों को प्रभावित कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, खांसी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
इसके अलावा एक और गंभीर मामला सामने आ रहा है। जानकारी के अनुसार, अधिकांश फैक्ट्रियों ने गुड़ निर्माण के लिए लाइसेंस लिया है, लेकिन वहां से रॉब (गुड़ का अर्ध-तैयार रूप) बनाकर शराब फैक्ट्रियों और अन्य औद्योगिक इकाइयों में भेजा जा रहा है। इस प्रक्रिया में अनियमितताओं और कांटा मारने (तौल में गड़बड़ी) की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं, लेकिन इन पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में जिले की वायु गुणवत्ता और अधिक खराब हो सकती है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन कराने, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और दोषी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की मांग की है।
अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस गंभीर समस्या पर कब और कैसे संज्ञान लेते हैं, ताकि लोगों को स्वच्छ हवा और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।





