
सी जी ऐन न्यूज़| कवर्धा ब्रजेश गुप्ता
खनिज न्यास मद (डीएमएफ) से खनन प्रभावित इलाकों में आकस्मिक चिकित्सा सेवाएं मजबूत करने के उद्देश्य से अक्टूबर 2025 में 14 स्टाफ नर्सों की नियुक्ति की गई। इनकी पोस्टिंग चिल्फी, तरेगांव जंगल, दलदली, झलमला, बैजलपुर और रेंगाखार के स्वास्थ्य केंद्रों में की गई थी। लेकिन वर्तमान में सभी नर्सें जिला अस्पताल कवर्धा में अटैच हैं।
इसी बीच चिल्फी घाट में हुए सड़क हादसे ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है।
चिल्फी घाट में हादसा, गोल्डन आवर में एंबुलेंस का इंतजार
रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर चिल्फी से करीब 4 किलोमीटर दूर अकलपरिया के पास शुक्रवार रात सड़क हादसा हुआ। अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक चालक राजू बंजारे (36), निवासी ग्राम परसमऊ, धुधवा (मा), गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल को 112 वाहन की मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिल्फी लाया गया। डॉक्टरों ने हालत नाजुक बताते हुए 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी।
बताया गया कि घाट में लंबे जाम के कारण एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच सकी। रेंगाखार जंगल से वैकल्पिक वाहन बुलाया गया। इस दौरान उपचार का ‘गोल्डन आवर’ निकलता रहा। परिजनों का आरोप है कि जो एंबुलेंस पहुंची, उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर तक उपलब्ध नहीं था।
बिना ऑक्सीजन रेफर की तैयारी, परिजनों का हंगामा
गंभीर रूप से घायल युवक को बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के शिफ्ट करने की तैयारी पर परिजन भड़क उठे। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ अस्पताल परिसर में हंगामा हुआ।
अंततः परिजन स्वयं चिल्फी स्वास्थ्य केंद्र से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए, जिसके बाद घायल को जिला अस्पताल कवर्धा भेजा गया। वहां से परिजन उसे रायपुर के निजी अस्पताल ले गए, जहां युवक आईसीयू में भर्ती है और स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
जिन केंद्रों में पोस्टिंग, वहां एक भी नर्स नहीं
डीएमएफ मद से जिन स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सों की नियुक्ति की गई थी, उनका विवरण इस प्रकार है:
दलदली पीएचसी – 2 नर्स
तरेगांव जंगल सीएचसी – 4 नर्स
बैजलपुर – 1 नर्स
चिल्फी पीएचसी – 1 नर्स
झलमला सीएचसी – 4 नर्स
रेंगाखार पीएचसी – 2 नर्स
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन केंद्रों में वर्तमान में एक भी नियुक्त नर्स कार्यरत नहीं है। सभी को जिला अस्पताल कवर्धा में अटैच कर दिया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में दुर्घटना और आपात चिकित्सा को देखते हुए स्टाफ की नियुक्ति की गई थी, लेकिन जरूरत वाले स्थानों पर सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
दो दिन में दो मौतें, फिर भी स्थायी समाधान नहीं
स्थानीय निवासियों के अनुसार, गुरुवार को चिल्फी क्षेत्र में हुए एक अन्य हादसे में दो लोगों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को फिर गंभीर दुर्घटना हुई।
इसके बावजूद न तो अटैचमेंट समाप्त करने की कोई ठोस पहल दिख रही है और न ही घाट में लगने वाले जाम की समस्या पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई।
50 बिस्तर अस्पताल की मांग फाइलों में
चिल्फी क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से 50 बिस्तर के अस्पताल की मांग कर रहे हैं। सांसद से लेकर जिला प्रशासन तक ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
जानकारी के अनुसार, चिल्फी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हर महीने औसतन 12 से 15 सड़क दुर्घटना के मामले पहुंचते हैं। यहां न तो एमबीबीएस डॉक्टर की नियमित उपलब्धता है, न पर्याप्त स्टाफ और न ही जीवनरक्षक उपकरण।
सीएमएचओ का पक्ष
सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र कुमार तुरे ने बताया कि डीएमएफ से स्टाफ नर्सों की नियुक्ति की गई है। मेडिकल कॉलेज के लिए स्टाफ की आवश्यकता को देखते हुए फिलहाल सभी नर्सें जिला अस्पताल कवर्धा में सेवाएं दे रही हैं। मेडिकल कॉलेज के लिए नई नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही नर्सों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाएगा।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
चिल्फी घाट में लगातार हो रही दुर्घटनाएं, समय पर एंबुलेंस और ऑक्सीजन की अनुपलब्धता तथा नियुक्त स्टाफ का मूल स्थान पर न होना—ये सभी तथ्य स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट यह संकेत देती है कि यदि घाट क्षेत्र में स्थायी चिकित्सा व्यवस्था, पर्याप्त स्टाफ और ट्रैफिक प्रबंधन पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं।





