_कवर्धा, 10 अप्रैल 2026_

छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देने वाली खबर सामने आई है। कान्हा टाइगर रिजर्व से दो शावकों के साथ एक बाघिन को सफलतापूर्वक भोरमदेव अभयारण्य, कवर्धा में शिफ्ट किया गया है। वन विभाग अब भोरमदेव को ही बाघों का स्थायी आवास बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है।

*शिकार की कमी होगी दूर, बनेगा नया ईको-सिस्टम*
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघों के स्थायित्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती शिकार की कमी थी। इसे दूर करने के लिए अभयारण्य में बड़े पैमाने पर सांभर और चीतल जैसे शाकाहारी वन्यप्राणियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके लिए 1 करोड़ रुपये की लागत से 30 से 100 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष घास के मैदान विकसित किए जाएंगे, ताकि शाकाहारी जानवर यहां रुकें और बाघों को पर्याप्त भोजन मिल सके।

*2010 में 60 थे, अब 112 बाघ*
भोरमदेव रिजर्व का दायरा वर्तमान में 352 वर्ग किमी है। साल 2010 में यहां बाघों की संख्या लगभग 60 थी, जो अब बढ़कर 112 हो गई है। दिसंबर 2025 में शावकों सहित बाघिन को यहां छोड़े जाने के बाद से वन विभाग का फोकस इस क्षेत्र को कान्हा की तर्ज पर विकसित करने पर है।

*कान्हा से सीधा कॉरिडोर, घटेगा दबाव*
भोरमदेव अभयारण्य प्राकृतिक कॉरिडोर के जरिए कान्हा टाइगर रिजर्व से सीधे जुड़ा है। कान्हा में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण वहां दबाव बढ़ रहा था। बाघिन की शिफ्टिंग से कान्हा का दबाव कम होगा और भोरमदेव में बाघों का कुनबा बढ़ेगा। पहले शिकार की कमी के कारण बाघ यहां टिकते नहीं थे, लेकिन नई योजना से यह समस्या खत्म होने की उम्मीद है।

वन विभाग का लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में भोरमदेव को मध्य भारत के प्रमुख टाइगर हैबिटेट के रूप में स्थापित किया जाए।

Brajesh Gupta

By Brajesh Gupta

Editor, cgnnews24.com