
कवर्धा। शिक्षा विभाग में गंभीर वित्तीय लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। ऑडिट के दौरान करीब 218 करोड़ रुपये के कैशबुक घोटाले का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 28 महीनों तक न तो कैशबुक लिखी गई और न ही आय–व्यय का कोई नियमित लेखा संधारित किया गया, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले में सहायक ग्रेड–2 की कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने बताया कि दोनों पर वित्तीय रिकॉर्ड अपडेट न करने और कैशबुक संधारण में गंभीर लापरवाही के आरोप सिद्ध हुए हैं। निलंबन अवधि में माया कसार का मुख्यालय बीईओ कार्यालय बोड़ला तय किया गया है।
ऑडिट में उजागर हुई अनियमितताएं
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2023 से जून 2025 के बीच बीईओ कार्यालय कवर्धा में लंबे समय तक कैशबुक नहीं लिखी गई। इस दौरान आय–व्यय का कोई विधिवत लेखा भी उपलब्ध नहीं पाया गया, जिसे शासकीय सेवक आचरण नियमों का सीधा उल्लंघन माना गया है।
फाइल गायब, भुगतान लंबित
योगेंद्र कश्यप पर दोहरे आरोप लगे हैं। प्राथमिक स्कूल के एक प्रकरण में संबंधित शिकायत की फाइल गायब पाई गई, वहीं दूसरी ओर फरवरी 2023 से जनवरी 2024 की अवधि में उनके प्रभार के दौरान संधारित रिकॉर्ड में राशि का हिसाब शून्य दर्शाया गया। जांच दल ने उन्हें प्रारंभिक रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
तत्कालीन बीईओ पर कार्रवाई नहीं
इधर, तत्कालीन बीईओ संजय पर फिलहाल कोई प्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं की गई है, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आगे की जांच रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।
शिक्षा विभाग में सामने आई इस बड़ी वित्तीय अनियमितता ने स्कूलों में संसाधनों की कमी और व्यवस्थागत पारदर्शिता को लेकर चल रही चिंताओं को और गहरा कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।





