बागेश्वर धाम विवाद पर सियासत तेज – भूपेश बघेल के आरोपों पर CM और डिप्टी CM का पलटवार
अवरछत्तीसगढ़ में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। हिंदुओं को लेकर की गई टिप्पणी पर उठे सवालों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश सरकार के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शास्त्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे धार्मिक आयोजनों की आड़ में छत्तीसगढ़ आकर पैसा कमाने आए हैं और बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। बघेल ने कहा, “जब वे पैदा भी नहीं हुए थे, तब से मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा हूं। आज हमें सनातन का ज्ञान देने चले हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि दिव्य दरबार में लोग ठीक हो रहे हैं तो मेडिकल कॉलेज खोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है। बघेल ने शास्त्रार्थ की खुली चुनौती भी दी।
इन आरोपों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत सदियों से संत-परंपरा वाला देश है और एक संत को राजनीतिक एजेंट कहना परंपरा का अपमान है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों का जवाब जनता देगी।
डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी बघेल के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शास्त्री समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं। “भूपेश बघेल को इसमें दिक्कत क्या है? उनके कार्यक्रम में भीड़ नहीं आती इसलिए वे ऐसा कह रहे हैं।” शर्मा का यह भी कहना है कि शास्त्री के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बघेल भले हनुमान चालीसा पढ़ते हों, लेकिन उनके विचार रावण और कुंभकर्ण की दिशा में नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के संस्कार उसकी वाणी और आचरण से दिखाई देते हैं।
इधर, दिव्य हनुमंत कथा के मंच से अयोध्या के राजू दास महाराज ने भी बघेल पर साधु-संतों को लेकर टिप्पणी न करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां संस्कृति का अपमान हैं और भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी।
लगातार बढ़ते बयानों से साफ है कि मुद्दा अब केवल धार्मिक न रहकर सियासी संघर्ष में बदल चुका है, और आने वाले समय में यह बहस और तेज होने के आसार





