
कवर्धा -:
पोलमी स्थित विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) आवासीय विद्यालय में कक्षा 6वीं की छात्रा राजेश्वरी बैगा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। छात्रा परीक्षा के बाद अचानक बीमार पड़ी थी। उसे उप-स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां मौजूद नर्स ने हालत गंभीर बताते हुए कुकदूर अस्पताल रेफर करने की सलाह दी, लेकिन न तो लिखित रेफरल बनाया गया और न ही बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बजाय उसे घर भेज दिया गया।
उसी रात तबीयत और बिगड़ने पर परिजन जब कुकदूर अस्पताल पहुंचे, तो इलाज शुरू होने से पहले ही छात्रा की मौत हो चुकी थी। यह मामला स्वास्थ्य और छात्रावास प्रबंधन—दोनों स्तरों पर गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
पोस्टमार्टम के समय भी जिम्मेदार अफसर नदारद
संदिग्ध मौत के बावजूद पोस्टमार्टम के दौरान विभागीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। न शिक्षा विभाग सक्रिय दिखा, न आदिवासी विकास विभाग। पीड़ित परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया।
मासिक स्वास्थ्य जांच के नियमों की अनदेखी
जानकारी के अनुसार छात्रा सिकल सेल से पीड़ित थी। नियमों के मुताबिक छात्रावासों में मासिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है, लेकिन यह प्रक्रिया नियमित नहीं हो रही। समय पर जांच होती तो स्थिति की गंभीरता पहले ही सामने आ सकती थी।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
जिले के अन्य आश्रम-छात्रावासों में भी इलाज में लापरवाही के चलते बच्चों की मौत और दुर्व्यवहार के मामले सामने आ चुके हैं। यह सिलसिला व्यवस्थागत खामियों की ओर इशारा करता है।
नियम विरुद्ध पदस्थापन और निगरानी की कमी
कई आश्रमों में अधीक्षकों की नियम विरुद्ध पदस्थापना और मुख्यालय में निवास न करना आम है। इससे छात्रों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अनुशासन पर सीधा असर पड़ रहा है।
यह मामला कवर्धा जिले में आदिवासी छात्रावासों की स्वास्थ्य-सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि जिम्मेदारों पर जवाबदेही तय हो और ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकी जाए।





